द देवरिया न्यूज़,मस्कट : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच गुरुवार को एक दुर्लभ और संवेदनशील घटना सामने आई, जब भारत और पाकिस्तान की नौसेना के युद्धपोत ओमान के तट के पास बेहद करीब आ गए। दोनों देशों के जहाजों के बीच महज 18 नॉटिकल मील की दूरी बताई जा रही है। आमतौर पर ऐसे हालात कम ही देखने को मिलते हैं, जिससे इस घटना ने रणनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति अचानक नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव और समुद्री यातायात में आई बाधाएं प्रमुख कारण हैं। दरअसल, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हालिया संघर्ष के चलते इस अहम समुद्री मार्ग पर अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने-अपने व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए इस क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं।
डेमियन साइमन नामक विश्लेषक ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ओमान तट से कुछ दूरी पर दोनों देशों के नौसैनिक जहाज एक साथ सक्रिय दिखे। उन्होंने इसे “दुर्लभ दृश्य” बताया और कहा कि क्षेत्रीय तनाव के बीच यह उपस्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है, दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करता है।
बीते डेढ़ महीने से इस क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया था। इसके जवाब में अमेरिका ने हाल ही में ईरानी बंदरगाहों और इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। इससे पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस समय अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए सतर्क हैं। भारत के लिए जहां ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है, वहीं पाकिस्तान भी अपने व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर सक्रिय है। यही कारण है कि दोनों देशों के युद्धपोत इस संवेदनशील क्षेत्र में गश्त करते नजर आ रहे हैं।
हालांकि, फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी प्रकार के टकराव की खबर नहीं है, लेकिन इतनी नजदीकी सैन्य मौजूदगी हमेशा जोखिम भरी मानी जाती है। छोटी सी चूक भी बड़े तनाव का कारण बन सकती है।
गौरतलब है कि 39 दिनों तक चले ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम का ऐलान हुआ था, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज और उसके आसपास की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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