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मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से 14 बच्चों की मौत, सरकारी डॉक्टर गिरफ्तार — जांच के लिए SIT गठित

Published on: October 6, 2025
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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली कफ सिरप पीने से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। वहीं, इस मामले में सरकारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन पर कथित तौर पर मिलावटी सिरप लिखने और वितरित करने का आरोप है।


⚠️ मामला कैसे शुरू हुआ

घटना की शुरुआत तब हुई जब छिंदवाड़ा जिले के कई इलाकों में बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने की शिकायतें सामने आईं। अभिभावकों ने बताया कि बच्चों को तेज बुखार और खांसी थी, जिसके बाद उन्होंने सरकारी अस्पताल से दवा ली थी।
दवा पीने के कुछ घंटों के भीतर बच्चों में उल्टी, बेहोशी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने लगे। कई बच्चों की हालत इतनी गंभीर हुई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, लेकिन डॉक्टरों ने 14 बच्चों को मृत घोषित कर दिया।


🧪 जांच में हुआ खुलासा: सिरप था मिलावटी

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि डॉक्टर प्रवीन सोनी ने जो कफ सिरप लिखी थी, उसमें खतरनाक रासायनिक तत्व मिले हुए थे।
एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट में सिरप में मेथेनॉल और अन्य विषैले पदार्थों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो बच्चों के शरीर पर घातक असर डालते हैं।


👮‍♂️ डॉक्टर प्रवीन सोनी गिरफ्तार

जांच के बाद पुलिस ने डॉ. प्रवीन सोनी, जो छिंदवाड़ा के सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत थे, को गिरफ्तार कर लिया है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने अवैध दवा कंपनियों से प्राप्त सिरप को बिना जांच के बच्चों को लिख दिया था।
राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित (Suspended) कर दिया है और अस्पताल प्रशासन से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।


🕵️ SIT करेगी गहराई से जांच

मध्य प्रदेश पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT टीम का गठन किया है।
पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल ने बताया कि SIT यह जांच करेगी कि मिलावटी सिरप कहाँ से खरीदा गया, कौन-सी फार्मा कंपनी ने इसे सप्लाई किया, और अस्पताल प्रशासन की भूमिका क्या रही
उन्होंने कहा कि “यह एक गंभीर अपराध है — जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हत्या के समान धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।”


🏥 सरकार ने दिए सख्त निर्देश

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे राज्य के सभी जिलों में कफ सिरप और बाल चिकित्सा दवाओं की जांच के आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा, “किसी भी डॉक्टर या मेडिकल स्टोर को बिना लाइसेंस या गुणवत्ता जांच के दवा बेचने की अनुमति नहीं है। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

राज्य सरकार ने मृत बच्चों के परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा भी की है।


🕯️ लोगों में गुस्सा और गम

छिंदवाड़ा और आसपास के गांवों में इस घटना के बाद लोगों में आक्रोश और शोक का माहौल है। कई परिवारों ने सरकार से मांग की है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।


🔚 निष्कर्ष:

मध्य प्रदेश में जहरीली कफ सिरप से हुई 14 बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने मामले को हत्या जैसे अपराध के रूप में लेते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों ने साफ किया है कि इस लापरवाही के दोषी कोई भी क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।


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