द देवरिया न्यूज़,ढाका : भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी बंटवारे को लेकर तनाव के बीच बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक बड़े बैराज परियोजना को मंजूरी दे दी है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का कहना है कि यह परियोजना भारत के फरक्का बैराज के प्रभाव को संतुलित करने के उद्देश्य से लाई गई है। पद्मा नदी को भारत में गंगा के नाम से जाना जाता है।
दोनों देशों के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर बनी संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। अब तक इसे आगे बढ़ाने को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच बांग्लादेश सरकार ने 13 अप्रैल को पद्मा बैराज परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दे दी।
34 हजार करोड़ टका की परियोजना
बांग्लादेश सरकार के अनुसार, इस मेगा प्रोजेक्ट पर करीब 34,497 करोड़ टका खर्च किए जाएंगे। जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी ने कहा कि परियोजना का मकसद देश के हिस्से में अधिक पानी संरक्षित करना और फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह “राष्ट्रीय हित” से जुड़ा मामला है और इस पर भारत से अलग से चर्चा की आवश्यकता नहीं समझी गई।
7 करोड़ लोगों को होगा फायदा
बांग्लादेश के योजना आयोग के मुताबिक, परियोजना से देश के लगभग एक-तिहाई भूभाग और करीब 7 करोड़ लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट ढाका, खुलना, राजशाही और बारीसाल डिवीजनों के 19 जिलों को कवर करेगा।
परियोजना के तहत कई प्रमुख नदियों के प्रवाह को बेहतर बनाने की योजना है, जिनमें गोराई-मधुमती, चंदना-बाराशिया, बराल और इचामती नदियां शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी और कृषि को बड़ा फायदा मिलेगा।
2.1 किमी लंबा होगा बैराज
इस परियोजना के तहत 2.1 किलोमीटर लंबा मुख्य बैराज बनाया जाएगा। इसके अलावा स्पिलवे, नेविगेशन लॉक, फिश पास, तटबंध और अन्य संरचनाएं भी विकसित की जाएंगी। दो हाइड्रोपावर प्लांट लगाने की भी योजना है, जिनकी कुल क्षमता 113 मेगावाट बताई गई है।
सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब 8,000 करोड़ टका का आर्थिक लाभ होगा।
फरक्का बैराज पर लंबे समय से विवाद
भारत ने 1970 के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका उद्देश्य हुगली नदी में जल प्रवाह बढ़ाकर कोलकाता पोर्ट की नौवहन क्षमता बनाए रखना था।
बांग्लादेश लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि सूखे के मौसम में पानी कम मिलने से उसके यहां कृषि, पर्यावरण और नदी पारिस्थितिकी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
हालांकि, बांग्लादेश के कुछ विशेषज्ञों ने इस परियोजना पर चिंता जताई है। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि इससे तलछट प्रवाह प्रभावित हो सकता है और नदी कटाव व बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों ने पद्मा नदी के करीब 145 किलोमीटर क्षेत्र में पर्यावरणीय जोखिम की आशंका भी जताई है।
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