इससे पहले ईरान की अर्धसरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने भी जानकारी दी थी कि तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक लिखित संदेश भेजा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अपनी सीमाओं और शर्तों का उल्लेख किया गया है।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह सीधे वॉशिंगटन से संपर्क कर सकता है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि मौजूदा हालात जारी रहे तो उसकी तेल पाइपलाइनें कुछ ही दिनों में गंभीर तकनीकी संकट का सामना कर सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की प्रमुख मांग है कि ईरान कम से कम दस वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) पूरी तरह रोक दे और अपने मौजूदा परमाणु भंडार को देश से बाहर भेजे। ट्रंप प्रशासन ने इस दिशा में सख्ती के संकेत दिए हैं और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाने की बात भी कही है।
वहीं, ईरान के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद सामने आ रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में मध्यस्थों से कहा कि अमेरिकी शर्तों को लेकर देश के नेतृत्व में एकराय नहीं है। ऐसे में ईरान का नया प्रस्ताव परमाणु मुद्दे को फिलहाल अलग रखते हुए एक त्वरित समझौते की संभावनाएं तलाशने की कोशिश माना जा रहा है।
कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते के लिए एक प्रारंभिक फ्रेमवर्क पर काम चल रहा है, जिसमें खाड़ी देशों की भी अहम भूमिका हो सकती है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसे उम्मीद है कि बातचीत का अगला दौर जल्द शुरू हो सकता है।
इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल के दिनों में सक्रिय कूटनीतिक दौरों पर हैं। वह तीन दिनों में दूसरी बार पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने आर्मी चीफ असीम मुनीर और अन्य शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद वह मॉस्को रवाना हो गए, जहां उनकी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात प्रस्तावित है।
मौजूदा घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि तनाव के बीच भी कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं, हालांकि किसी ठोस समझौते तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है।