द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : दक्षिण एशिया में परमाणु खतरे को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन (SPD) में आर्म्स कंट्रोल एडवाइजर और पूर्व ब्रिगेडियर जहीर काजमी ने चेतावनी दी है कि जिस स्थिति को दुनिया “स्थिर” मान रही है, उसके पीछे गंभीर जोखिम छिपा हुआ है। उन्होंने यह टिप्पणी कार्नेगी एंडोमेंट की हालिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए की, जिसमें भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावना को “कम” बताया गया है।
कार्नेगी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद परमाणु टकराव की आशंका कम है और अक्सर इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सीमित सैन्य कार्रवाई को वास्तविक परमाणु खतरे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि, जहीर काजमी ने इस आकलन को “अपूर्ण और खतरनाक” करार दिया है। पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल में लिखे अपने लेख में उन्होंने कहा कि यह विश्लेषण देखने में भले संतुलित लगे, लेकिन रणनीतिक रूप से यह गलत निष्कर्ष देता है और नीति निर्धारण को भ्रमित कर सकता है।
काजमी ने साफ कहा, “यह मान लेना कि परमाणु खतरा कम है, वास्तविकता से दूर है। दक्षिण एशिया का इतिहास इस धारणा का समर्थन नहीं करता।” उन्होंने चेताया कि इस तरह की सोच से देशों के बीच “संयम” की जगह “लापरवाही” बढ़ सकती है, जो हालात को और गंभीर बना सकती है।
उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध, 2001-02 का सैन्य गतिरोध, 2008 मुंबई हमले, 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 पुलवामा-बालाकोट और 2025 के हालिया तनाव का हवाला देते हुए कहा कि बड़े युद्ध इसलिए नहीं टले क्योंकि खतरा कम था, बल्कि इसलिए कि दोनों देश परमाणु जोखिम को लेकर बेहद सतर्क रहे हैं।
काजमी के मुताबिक, पश्चिमी विश्लेषक अक्सर भारत-पाक तनाव को “शोर” मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि वास्तविकता में यह स्थिति कभी भी नियंत्रण से बाहर जा सकती है। उन्होंने “लिमिटेड वॉर” (सीमित युद्ध) की अवधारणा को भी भ्रम बताया।
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया का भौगोलिक और रणनीतिक ढांचा ऐसा है कि कोई भी सीमित सैन्य कार्रवाई तेजी से पूर्ण युद्ध में बदल सकती है। “यहां फैसले लेने का समय बहुत कम होता है और गलतफहमी की संभावना बहुत ज्यादा रहती है,” काजमी ने लिखा।
नई सैन्य तकनीकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मिसाइलों का कैनिस्टराइजेशन और प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता ने प्रतिक्रिया का समय और भी घटा दिया है, जिससे तनाव के समय निर्णय लेना और अधिक जटिल हो गया है।
इसके अलावा, काजमी ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे संवाद की कमी को भी एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संवाद कमजोर होने के कारण किसी भी संकेत का गलत अर्थ निकाला जा सकता है, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में किसी संकट के दौरान बाहरी शक्तियां समय पर हस्तक्षेप नहीं कर पातीं, तो स्थानीय स्तर पर संघर्ष को रोकने का कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है।
काजमी की इस चेतावनी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दक्षिण एशिया में दिख रही “शांति” वास्तव में स्थायी है या फिर यह केवल संतुलन का एक नाजुक दौर है, जो किसी भी वक्त बड़े संकट में बदल सकता है।
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