सोमवार को मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू और चिल्ड्रेन वार्ड दोनों पूरी तरह फुल रहे। कुल 35 बेड की क्षमता के मुकाबले 79 बच्चे भर्ती थे। डॉक्टरों ने इलाज के बाद 27 बच्चों को छुट्टी दी, लेकिन दिन में चार नए मरीज भर्ती हो गए। दोपहर तक 56 बच्चे वार्ड में भर्ती थे। इनमें 15 बेड वाले पीआईसीयू में 22 बच्चे और 30 बेड वाले चिल्ड्रेन वार्ड में 34 बच्चे भर्ती रहे। यानी डिस्चार्ज के बाद भी डेढ़ गुना मरीजों की संख्या बनी रही।
भर्ती मरीजों में करीब 70 प्रतिशत बच्चे सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं। कई बच्चों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है।
खुखुंदू की दो वर्षीय शिवानी को बुखार और सांस की परेशानी के चलते भर्ती कराया गया है। गौरीबाजार के पांच वर्षीय हसन को बुखार के कारण दाखिल किया गया। सलेमपुर निवासी 15 माह का आदर्श पांच दिन से मेडिकल कॉलेज में भर्ती है और अब उसकी हालत में सुधार है। बरियारपुर की तीन माह की आराध्या फीवर से पीड़ित थी, जिसका इलाज चल रहा है।
मौसम बदलने से बढ़ी परेशानी:
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. श्रीवास्तव ने बताया कि मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को पूरी तरह ढककर रखें, ठंडी हवा और धूल से बचाएं तथा सूर्यास्त के बाद उन्हें बाहर न निकलने दें।
सावधानी ही बचाव:
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि इस मौसम में बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, साफ-सफाई पर ध्यान दें और ठंडे पेय या बाहर का खाना देने से बचें। किसी भी तरह के बुखार या सांस की तकलीफ की स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
देवरिया मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्यकर्मियों की टीम दिन-रात मरीजों की देखभाल में जुटी है ताकि बच्चों को जल्द स्वस्थ किया जा सके।