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बंगाल चुनाव में ‘भद्रलोक’ पर नजर, TMC विरोध के बीच BJP की शहरी चुनौती बरकरार

Published on: April 30, 2026
Eye on 'Bhadralok' in Bengal elections
द  देवरिया न्यूज़,कोलकाता : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन के खिलाफ नाराजगी के संकेत मिल रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में अपने संगठन को पहले से ज्यादा मजबूत किया है। हिंदू एकजुटता के एजेंडे को भी कुछ इलाकों में समर्थन मिला है। इसके बावजूद चुनाव के दूसरे चरण में, खासकर कोलकाता और आसपास के शहरी क्षेत्रों में BJP के लिए मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP की रणनीति अब बंगाल के शिक्षित हिंदू मध्यम वर्ग—जिसे आमतौर पर ‘भद्रलोक’ कहा जाता है—पर केंद्रित होती दिख रही है। ऐतिहासिक रूप से ‘भद्रलोक’ शब्द का इस्तेमाल बंगाल के पढ़े-लिखे, मध्यम वर्गीय हिंदुओं के लिए किया जाता रहा है, जिनका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव लंबे समय तक कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रहा है।

हालांकि, यह वर्ग कभी एकजुट होकर किसी एक राजनीतिक दल के साथ नहीं रहा, लेकिन इसकी सांस्कृतिक स्वीकृति किसी भी पार्टी के लिए शहरी क्षेत्रों में अहम मानी जाती है। आज भी भद्रलोक खुद को बंगाली संस्कृति और परंपरा का संरक्षक मानता है, और उसकी सोच का असर चुनावी माहौल पर पड़ता है।

BJP इसी वर्ग में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ पहचान की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और नागरिक सुविधाओं पर भी ध्यान दे रही है।

दक्षिण कोलकाता का रासबिहारी इलाका इसका उदाहरण माना जा रहा है, जहां BJP ने स्वपन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। उनके चुनावी वादों में कालीघाट और आदि गंगा के पुनर्विकास, रवींद्र सरोवर के संरक्षण और क्षेत्र के बेहतर शहरी प्रबंधन की बातें शामिल हैं। इन मुद्दों के जरिए BJP स्थानीय और सांस्कृतिक चिंताओं से खुद को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, रासबिहारी और आसपास के इलाके लंबे समय से TMC के मजबूत गढ़ रहे हैं। ऐसे में BJP के लिए यहां जमीन बनाना आसान नहीं है। पार्टी की कोशिश है कि वह खुद को “बाहरी” की छवि से निकालकर एक “स्थानीय और संवेदनशील” विकल्प के रूप में पेश करे।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति पारंपरिक भद्रलोक वर्ग पर निर्भर नहीं रही है। उन्होंने समाज के व्यापक वर्गों के साथ जुड़कर अपनी पकड़ मजबूत की है। लेकिन समय के साथ इस वर्ग के एक हिस्से में असहजता भी देखने को मिली है।

हाल के वर्षों में भर्ती घोटाले, कथित सिंडिकेट राज और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों ने इस असंतोष को और मुखर किया है। यही कारण है कि अब यह वर्ग खुलकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करने लगा है।

कुल मिलाकर, बंगाल का चुनावी परिदृश्य जटिल बना हुआ है, जहां एक ओर TMC की मजबूत पकड़ है, वहीं BJP शहरी और मध्यम वर्गीय मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। चुनाव के नतीजे काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि भद्रलोक जैसे प्रभावशाली वर्ग का झुकाव किस दिशा में जाता है।


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