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43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे पीएम मोदी, ओस्लो में होगा तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

Published on: May 19, 2026
PM Modi reached Norway after 43 years

द  देवरिया न्यूज़,ओस्लो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच गए हैं। करीब 43 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला नॉर्वे दौरा है। इससे पहले वर्ष 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नॉर्वे की यात्रा की थी।

पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप सुरक्षा चुनौतियों, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। वहीं, हरित प्रौद्योगिकी और आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक रुचि के कारण भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

ओस्लो में होगा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

ओस्लो इस वर्ष तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के साथ नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे।

नॉर्वे पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने कहा,
“ओस्लो पहुंचकर खुशी हुई। प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त करता हूं। चार दशकों से अधिक समय बाद हो रही यह प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों को नई मजबूती देगी।”

उन्होंने बताया कि वह नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और महारानी सोन्या से मुलाकात करेंगे तथा प्रधानमंत्री स्टोर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

नॉर्डिक देशों पर भारत का बढ़ता फोकस

लंबे समय तक भारत की यूरोप नीति मुख्य रूप से फ्रांस, जर्मनी और रूस जैसे देशों पर केंद्रित रही। लेकिन अब भारत नॉर्डिक देशों के साथ संबंधों को रणनीतिक रूप से मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

नॉर्डिक देशों की संयुक्त जीडीपी 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और ये देश ग्रीन हाइड्रोजन, समुद्री नवाचार, डीप-टेक, भू-तापीय ऊर्जा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हैं।

नॉर्वे ने बताया ऐतिहासिक दौरा

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को “ऐतिहासिक” करार दिया। उन्होंने कहा,
“1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। हमें उम्मीद है कि इस दौरे से भारत-नॉर्वे संबंध और मजबूत होंगे।”

2018 में शुरू हुई थी शिखर सम्मेलन प्रक्रिया

भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2018 में स्टॉकहोम में हुई थी, जबकि दूसरा सम्मेलन 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुआ। अमेरिका के अलावा भारत ही ऐसा देश है जिसके साथ नॉर्डिक देश इस तरह का विशेष शिखर सम्मेलन आयोजित करते हैं।

तीसरा सम्मेलन पहले 2025 में प्रस्तावित था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। अब इसका आयोजन ओस्लो में हो रहा है।

ग्रीन ट्रांजिशन और ब्लू इकॉनमी पर जोर

नॉर्वे की राजदूत स्टेनर के मुताबिक इस शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस ग्रीन ट्रांजिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री सहयोग, डिजिटल इनोवेशन और ब्लू इकॉनमी पर रहेगा। उन्होंने कहा कि नॉर्डिक देश भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए उत्सुक हैं और हेल्थ टेक, जलवायु समाधान तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।


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