इस मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के दबाव में भारत ने अपनी ऊर्जा नीति से जुड़े स्वतंत्र फैसले लेने की क्षमता कमजोर कर दी है।
“इतिहास इसे याद रखेगा” : प्रियंका चतुर्वेदी
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत ने अमेरिका के सामने अपने ऊर्जा हितों से जुड़े अधिकार “सरेंडर” कर दिए हैं।
उन्होंने लिखा,
“एक व्यापार समझौते की आड़ में, अमेरिका के सामने रूसी तेल और गैस खरीदने के अपने अधिकार सरेंडर करने के बाद, अमेरिका ने खरीद के लिए 16 मई तक का समय दिया था। अब ऐसा लगता है कि इस समय-सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और इसके परिणाम भारतीयों को भुगतने पड़ेंगे।”
उन्होंने आगे कहा,
“इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि अब घबराहट पैदा करने वाले भाषणों का दौर शुरू हो चुका है। अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते की खातिर, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े संप्रभु निर्णय लेने की अपनी क्षमता ही खो दी। इतिहास इसे जरूर याद रखेगा।”
क्या है पूरा मामला?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने रूस के उस LNG कार्गो को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है जो अमेरिका के प्रतिबंधों के तहत आने वाले पोर्टोवाया LNG प्लांट से भेजा गया था। यह प्लांट रूस के बाल्टिक सागर क्षेत्र में स्थित है।
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल के मध्य में यह LNG कार्गो भारत के लिए रवाना हुआ था, लेकिन भारत की ओर से अनिच्छा जताए जाने के बाद जहाज को खाली नहीं किया जा सका।
सूत्रों का कहना है कि जहाज के दस्तावेजों में कार्गो को “गैर-रूसी” दिखाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसकी निगरानी की जा रही थी और असली स्रोत की पहचान कर ली गई।
सिंगापुर के पास रुका टैंकर
LSEG शिपिंग डेटा के अनुसार 138,200 क्यूबिक मीटर क्षमता वाला LNG टैंकर “कुनपेंग” पश्चिमी भारत के LNG आयात टर्मिनल की ओर बढ़ रहा था। हालांकि अब यह जहाज सिंगापुर के समुद्री क्षेत्र के पास रुका हुआ है और उसने अपनी मंजिल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
सूत्रों के मुताबिक भारत ने 30 अप्रैल को रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन की भारत यात्रा के दौरान यह स्पष्ट कर दिया था कि वह अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित LNG कार्गो नहीं खरीदेगा।
भारत-रूस के बीच जारी है बातचीत
रिपोर्ट के अनुसार पावेल सोरोकिन ने अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की थी।
बताया जा रहा है कि पिछले दो महीनों में यह उनकी दूसरी भारत यात्रा थी और जून में एक बार फिर दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत हो सकती है।
हालांकि भारत ने प्रतिबंधित LNG कार्गो लेने से इनकार किया है, लेकिन रूस से अन्य ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बातचीत जारी है।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक दबाव के बीच भारत
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की थी। इससे भारत को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली थी। लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अब ऊर्जा कारोबार जटिल होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत एक तरफ अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक एवं व्यापारिक संबंधों को भी संतुलित रखना उसकी मजबूरी है।
इसी कारण प्रतिबंधित LNG कार्गो को लेकर भारत ने सतर्क रुख अपनाया है। हालांकि विपक्ष इसे सरकार की “विदेश नीति और आर्थिक स्वतंत्रता” से जोड़कर सवाल उठा रहा है।