द देवरिया न्यूज़,बीजिंग : चीन में सेना के भीतर बढ़ते भ्रष्टाचार और शीर्ष सैन्य अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोपों के बीच सरकार ने राष्ट्रवादी भावनाओं को हवा देने के लिए एक नया भावनात्मक अभियान शुरू किया है। मदर्स डे (10 मई) के मौके पर चीनी सरकारी मीडिया ने गलवान घाटी संघर्ष में मारे गए सैनिकों की माताओं के वीडियो प्रसारित किए। इन वीडियो में माताएं अपने बेटों की प्रतिमाओं को देखकर भावुक होती और रोती दिखाई दे रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे सवालों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश है।
चीनी सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, मदर्स डे की पूर्व संध्या पर जून 2020 के गलवान संघर्ष में मारे गए सैनिकों चेन शियांगरोंग, शियाओ सियुआन और वांग झुओरान की माताओं ने बीजिंग स्थित ‘चीनी जन क्रांति सैन्य संग्रहालय’ का दौरा किया। संग्रहालय में उनके बेटों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। वीडियो में दिखाया गया कि अपने बेटों की मूर्तियों को देखकर माताएं भावुक हो गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं।
सरकारी मीडिया ने इस वीडियो को “गलवान घाटी के शहीदों की मांएं मदर्स डे से पहले अपने बेटों को दिल से याद कर रही हैं” शीर्षक के साथ प्रसारित किया। यह वीडियो चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया और इसे बड़े पैमाने पर साझा किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने इस भावनात्मक अभियान के जरिए जनता में राष्ट्रवाद और सेना के प्रति समर्थन बढ़ाने की कोशिश की है। दुनियाभर में मदर्स डे को परिवार और मातृत्व के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, लेकिन चीन ने इस अवसर का इस्तेमाल सैन्य बलिदान और देशभक्ति के संदेश को मजबूत करने के लिए किया।
यह अभियान ऐसे समय सामने आया है जब चीनी सेना में भ्रष्टाचार को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि चीन के पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई, हालांकि बाद में इन सजाओं को स्थगित कर दिया गया। इन खबरों ने चीन के सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर कई चीनी नागरिकों ने सेना के भीतर फैले भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि पीएलए के उच्च अधिकारियों के बीच भाई-भतीजावाद, हथियारों की खरीद में अपारदर्शिता और सत्ता के दुरुपयोग जैसी समस्याएं गहरी जड़ें जमा चुकी हैं। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि सेना के वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारी निजी लाभ के लिए सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे माहौल में गलवान के सैनिकों और उनकी माताओं को केंद्र में रखकर तैयार किए गए वीडियो का उद्देश्य जनता की भावनाओं को सैन्य बलिदान की ओर मोड़ना है, ताकि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हो रही आलोचना को कम किया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने चीन की प्रचार रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। चीन अक्सर पश्चिमी देशों से जुड़े त्योहारों और सांस्कृतिक प्रभावों की आलोचना करता रहा है। लेकिन जब ऐसे अवसरों का इस्तेमाल सरकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने और राष्ट्रवादी भावनाएं भड़काने के लिए किया जा सकता है, तब वही त्योहार सरकारी प्रचार का हिस्सा बना दिए जाते हैं।
गलवान घाटी में जून 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। भारत ने अपने शहीद सैनिकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया था, जबकि चीन ने काफी समय तक अपने सैनिकों की मौत के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे। बाद में चीन ने सीमित संख्या में सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की थी।
अब, लगभग छह साल बाद, चीन एक बार फिर गलवान संघर्ष को भावनात्मक और राष्ट्रवादी प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करता दिखाई दे रहा है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह रणनीति सेना में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक असंतोष से ध्यान हटाने का प्रयास है।
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