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पैक्स सिलिका गठबंधन में भारत की एंट्री, सेमीकंडक्टर-एआई सप्लाई चेन में मजबूत होगी देश की रणनीतिक स्थिति

Published on: February 21, 2026
India in Pax Silica alliance

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को अमेरिका की अगुवाई वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर इस वैश्विक पहल में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। यह हस्ताक्षर नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान किए गए। इस कदम को भारत के लिए टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में बड़ी रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या है पैक्स सिलिका पहल

पैक्स सिलिका को 12 दिसंबर 2025 को वॉशिंगटन में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर बनाना है। इस पहल का लक्ष्य इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सीमित देशों पर निर्भरता कम करना और तकनीकी व आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अमेरिकी विदेश उपमंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि इस घोषणा पर हस्ताक्षर का मकसद सप्लाई चेन पर निर्भरता को हथियार बनने से रोकना और सहयोग के जरिए स्थिर व्यवस्था बनाना है।

कौन-कौन से देश हैं शामिल

इस रणनीतिक गठबंधन में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख तकनीकी देश पहले से शामिल हैं। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, कतर, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम भी इस पहल का हिस्सा हैं। अब भारत के शामिल होने से इस गठबंधन की वैश्विक ताकत और बढ़ गई है।

भारत को क्या होगा फायदा

भारत लंबे समय से क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहा है। खासतौर पर चीन पर निर्भरता को लेकर भारत ने कई बार चिंता जताई है। पैक्स सिलिका में शामिल होने से भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण, एआई विकास और क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह गठबंधन भारत की उन योजनाओं को गति देगा, जिनके तहत देश सेमीकंडक्टर निर्माण और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में काम कर रहा है।

चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर-अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिज आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के लिए बेहद जरूरी हैं। इन संसाधनों की सप्लाई पर अभी कुछ देशों का दबदबा है। पैक्स सिलिका में शामिल होकर भारत इन संसाधनों की सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित कर सकेगा और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम कर पाएगा।

वैश्विक टेक्नोलॉजी निर्माण में बढ़ेगी भारत की भूमिका

मौजूदा समय में ताइवान दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर निर्माता है और उन्नत चिप निर्माण में उसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वहीं चीन निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में पैक्स सिलिका जैसे गठबंधन का हिस्सा बनकर भारत अब केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन से भारत की तकनीकी क्षमता, वैश्विक साझेदारी और आर्थिक सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।



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