द देवरिया न्यूज़,देवरिया। साइबर जालसाजों ने देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बना ली। इस फेक ID के जरिए लोगों को मैसेंजर पर संदेश भेजकर रुपए मांगे जा रहे थे। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
शनिवार रात करीब 10 बजे फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने लोगों को सतर्क किया और साइबर ठगी से बचने की अपील की।
DM के नाम से भेजी जा रही फ्रेंड रिक्वेस्ट और मैसेज
जानकारी के अनुसार, साइबर जालसाजों ने जिलाधिकारी के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर नकली प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद इस अकाउंट से लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट और मैसेज भेजे गए। बताया जा रहा है कि संपर्क स्थापित करने के बाद जालसाज मैसेंजर के जरिए लोगों से रुपए की मांग करने लगे। अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल किए जाने के कारण कई लोग इसे वास्तविक अकाउंट समझ सकते थे।
‘फर्जी ID से आने वाले मैसेज का जवाब न दें’
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने लोगों से अपील की है कि उनके नाम से किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट या फर्जी ID से मैसेज, फ्रेंड रिक्वेस्ट या रुपए भेजने का अनुरोध प्राप्त होने पर उस पर प्रतिक्रिया न दें। उन्होंने लोगों से कहा कि किसी भी परिस्थिति में बैंक खाते की जानकारी, OTP, पासवर्ड या अन्य निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। बिना सत्यापन के किसी भी खाते में रुपए ट्रांसफर करने से भी बचें।
नाम और फोटो देखकर अकाउंट को असली न मानें
साइबर जालसाज अक्सर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाते हैं। इसके बाद लोगों का विश्वास हासिल कर उनसे रुपए या गोपनीय जानकारी लेने की कोशिश की जाती है। ऐसे में केवल नाम और फोटो देखकर किसी सोशल मीडिया अकाउंट को वास्तविक मानना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल की जानकारी को पहले सत्यापित करना जरूरी है।
रुपए मांगने पर पहले करें पुष्टि
यदि किसी अधिकारी, रिश्तेदार, परिचित या अन्य व्यक्ति के नाम से सोशल मीडिया पर रुपए मांगने वाला मैसेज मिलता है तो तत्काल भुगतान न करें। संबंधित व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से सीधे संपर्क कर पहले इसकी पुष्टि करें। संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल को संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट और ब्लॉक किया जा सकता है। साथ ही मामले की सूचना पुलिस या साइबर अपराध शाखा को दी जानी चाहिए।
पुलिस ने शुरू की जांच
फर्जी ID का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस साइबर जालसाजों की पहचान करने के साथ यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी प्रोफाइल के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया और कितने लोगों से रुपए की मांग की गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि डीएम के नाम से आने वाले किसी भी संदिग्ध मैसेज या फ्रेंड रिक्वेस्ट का जवाब न दें और अपनी निजी अथवा बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
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