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स्मृति ईरानी को मिली यूपी की कमान, 2027 चुनाव से पहले BJP ने खेला बड़ा दांव

Published on: August 18, 2026
Smriti Irani gets UP

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में स्मृति ईरानी के सामने बीजेपी के लिए सत्ता बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी।

अमेठी की हार के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी

स्मृति ईरानी के लिए राष्ट्रीय महासचिव बनना और यूपी की कमान मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद से उन्हें संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली थी। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। कांग्रेस के गढ़ में राहुल गांधी को हराने के बाद स्मृति बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गई थीं।

यूपी में बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के बाद स्मृति ईरानी के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां होंगी। राज्य में बीजेपी को 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए विपक्ष की रणनीति का मुकाबला करना होगा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी लगातार अलग-अलग मुद्दों को लेकर बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में स्मृति ईरानी की जिम्मेदारी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में जोश बनाए रखने और विपक्ष के हमलों का राजनीतिक जवाब देने की होगी। यूपी का महत्व केवल विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है। राज्य में लोकसभा की 80 सीटें हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। इसलिए 2027 के विधानसभा चुनाव का असर 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

कांग्रेस के गढ़ अमेठी में रचा था इतिहास

स्मृति ईरानी का अमेठी से खास राजनीतिक जुड़ाव रहा है। अमेठी लंबे समय तक गांधी परिवार और कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है। 1967 में लोकसभा सीट बनने के बाद लंबे समय तक यहां कांग्रेस का दबदबा रहा। 1998 में बीजेपी के संजय सिंह ने कांग्रेस नेता और सोनिया गांधी के करीबी सतीश शर्मा को हराकर कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाई थी। इसके बाद 1999 में सोनिया गांधी ने अमेठी से चुनाव जीतकर कांग्रेस की वापसी कराई।

राहुल गांधी को तीन बार हराया, फिर स्मृति ने बदला समीकरण

2004 में राहुल गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2009 और 2014 में भी राहुल गांधी ने यहां से जीत दर्ज की। लगातार तीन चुनाव जीतने के बाद अमेठी को राहुल गांधी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाने लगा था। लेकिन 2019 में बीजेपी ने स्मृति ईरानी को मैदान में उतारा। उन्होंने राहुल गांधी को करीब 55 हजार वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया। इस जीत ने स्मृति ईरानी को बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं में स्थापित कर दिया।

अब 2027 पर नजर

अब स्मृति ईरानी को यूपी की कमान मिलने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता फिर बढ़ने की संभावना है। उनके सामने संगठन को चुनावी मोड में लाने, बीजेपी के आधार को मजबूत करने और विपक्षी दलों की रणनीति का मुकाबला करने की चुनौती होगी।

2027 का यूपी विधानसभा चुनाव स्मृति ईरानी के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। अमेठी में कांग्रेस के मजबूत गढ़ को चुनौती दे चुकीं स्मृति अब पूरे उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए कितना प्रभावी चुनावी नेतृत्व दे पाती हैं, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।


इसे भी पढ़ें : वंदे मातरम्’ विवाद पर बीजेपी का कांग्रेस पर हमला, प्रदीप भंडारी ने सोनिया-राहुल से पूछे पांच सवाल


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