द देवरिया न्यूज़,काहिरा : मिस्र के भूमध्यसागरीय बंदरगाह डमिएटा में दो गैस जहाजों पर हुए ड्रोन हमले ने वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हमले के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई, जिस पर काफी मशक्कत के बाद काबू पाया गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से ही तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग प्रभावित है।
डमिएटा बंदरगाह स्वेज नहर के नजदीक स्थित है। स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है और इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। ऐसे में इसके आसपास किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती वैश्विक सप्लाई चेन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
अज्ञात ड्रोन ने जहाज को बनाया निशाना
मिस्र की सरकार के मुताबिक, बुधवार को एक अज्ञात ड्रोन ने डमिएटा बंदरगाह में खड़े दो जहाजों को निशाना बनाया। हमले में अमेरिका के स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर एनर्गोस विंटर में आग लग गई। इसके बाद आग पास खड़े दूसरे जहाज तक भी पहुंच गई।
फिलहाल किसी संगठन या देश ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। घटना की जांच की जा रही है। हमले के पीछे ईरान या यमन के हूती विद्रोहियों की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि ईरान ने डमिएटा ड्रोन हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
लाल सागर के बाद स्वेज नहर पर भी बढ़ा खतरा
डमिएटा में हुई घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है क्योंकि लाल सागर में हूती हमलों के कारण पहले से ही अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित रही है। अगर सुरक्षा स्थिति और बिगड़ती है तथा जहाज स्वेज नहर के रास्ते से दूरी बनाने लगते हैं, तो इसका असर यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच होने वाले व्यापार पर पड़ सकता है।
स्वेज नहर के जरिए हर साल बड़ी मात्रा में तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान का परिवहन होता है। इस मार्ग में बाधा आने पर जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से संकट
इस बीच, फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में भी तनाव के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। यह मार्ग सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और बहरीन जैसे खाड़ी देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
होर्मुज के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
स्वेज नहर बंद हुई तो भारत की बढ़ेगी चिंता
स्वेज नहर में किसी बड़े व्यवधान का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत और यूरोप के बीच व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। स्वेज नहर के रास्ते जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
स्वेज मार्ग भारत और यूरोप के बीच समुद्री दूरी को हजारों किलोमीटर तक कम करता है और यात्रा में कई दिन की बचत होती है। इससे ईंधन और परिवहन लागत भी कम रहती है। अगर सुरक्षा कारणों से जहाजों को स्वेज नहर के बजाय केप ऑफ गुड होप का रास्ता अपनाना पड़ा, तो माल ढुलाई का खर्च और डिलीवरी का समय दोनों बढ़ सकते हैं। इसका असर भारतीय निर्यातकों, आयातकों और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लाल सागर, होर्मुज और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर एक साथ बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में डमिएटा ड्रोन हमले की जांच और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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