द देवरिया न्यूज़,चंडीगढ़ : पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होने के साथ ही कांग्रेस के भीतर एक बार फिर नेतृत्व को लेकर खींचतान सामने आने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
2021 जैसी स्थिति बनने की आशंका
पार्टी के मौजूदा हालात 2021 के उस दौर की याद दिला रहे हैं, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय तक चली खींचतान ने कांग्रेस को कमजोर कर दिया था। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
हाईकमान ने साधने की कोशिश की थी संतुलन
आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन में संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया था। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालांकि, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चन्नी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी चाहते थे। फैसला उनके पक्ष में नहीं आने के बाद उनकी नाराजगी धीरे-धीरे सार्वजनिक होती दिखाई दे रही है।
समर्थकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं चन्नी
बीते कुछ दिनों में चरणजीत सिंह चन्नी अपने समर्थक विधायकों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। मोरिंडा स्थित उनके आवास पर हुई बैठकों को भी इसी राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों को पार्टी नेतृत्व तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग भी लगातार विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं से संपर्क मजबूत करने में जुटे हैं।
चन्नी समर्थकों की क्या है मांग?
चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों का कहना है कि पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री होने और राज्य में उनके जनाधार को देखते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था। कुछ समर्थक यह भी चाहते हैं कि पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करे। दूसरी ओर, राजा वड़िंग के समर्थक 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला देते हुए मानते हैं कि मौजूदा नेतृत्व में बदलाव की जरूरत नहीं है।
चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह अंदरूनी खींचतान लंबी चली, तो कांग्रेस की चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है। पंजाब में फिलहाल आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
ऐसे में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना और चुनाव से पहले नेतृत्व से जुड़े विवादों को सुलझाना होगा। यदि गुटबाजी बढ़ती है, तो विपक्ष के रूप में कांग्रेस की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
नोट: चन्नी और राजा वड़िंग के बीच मतभेदों को लेकर विभिन्न राजनीतिक चर्चाएं और मीडिया रिपोर्टें सामने आई हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस विषय पर आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया या अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।
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