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कोयला गैसीकरण से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भारत, 37,500 करोड़ की योजना को मंजूरी

Published on: June 1, 2026
Energy self-sufficiency through coal gasification

द  देवरिया न्यूज़,धनबाद : देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयला उद्योग में बड़े बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम योजना को मंजूरी दी है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच भारत अब कोल गैसीफिकेशन (Coal Gasification) तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी कर रहा है।

गहरी खदानों से गैस उत्पादन की योजना

इस नई तकनीक के तहत उन कोयला खदानों से गैस तैयार की जाएगी, जहां गहराई अधिक होने के कारण पारंपरिक खनन मुश्किल और महंगा हो गया है। अब कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे सिंथेटिक गैस (Syngas) में बदला जाएगा, जिसका उपयोग कई औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकेगा।

कोल इंडिया और बड़ी कंपनियों की साझेदारी

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कोल इंडिया लिमिटेड ने गेल, भेल और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के साथ साझेदारी की है। इन कंपनियों के बीच पहले से हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अब संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के जरिए जमीन पर काम शुरू किया जा रहा है।

सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि को भी मंजूरी दी है, जिससे इसे तेजी से लागू किया जा सके।

2030 तक 100 मिलियन टन का लक्ष्य

सरकारी योजना के अनुसार, भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना है। वर्तमान में देश में कोयले का अधिकतर उपयोग बिजली उत्पादन (थर्मल पावर) में होता है, लेकिन इस नई तकनीक से इसका उपयोग और व्यापक हो जाएगा।

इससे तैयार होने वाली गैस का इस्तेमाल मेथेनॉल, अमोनिया, उर्वरक (फर्टिलाइजर) और रासायनिक उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।

आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम

इस परियोजना को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे देश की विदेशी आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है, खासकर रसायन और उर्वरक क्षेत्र में।

इसके अलावा, आयात बिल में कमी आने से राजकोषीय घाटे पर दबाव घटेगा और रुपये की स्थिरता को भी समर्थन मिलेगा।

रोजगार के नए अवसर

अनुमान के मुताबिक, इस परियोजना से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला गैसीकरण से जुड़े नए उद्योगों के विकसित होने पर स्थानीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव

कोल गैसीफिकेशन को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ कोयले के उपयोग को अधिक कुशल बनाएगी, बल्कि इसे एक बहुउपयोगी ऊर्जा संसाधन में भी बदल देगी।

सरकार का मानना है कि यह कदम भारत को दीर्घकाल में ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन दोनों क्षेत्रों में अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा।



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