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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बरकरार, 84 दिन बाद भी वैश्विक व्यापार प्रभावित

Published on: May 23, 2026
Iran on the Strait of Hormuz
द  देवरिया न्यूज़,तेहरान : ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष शुरू होने के 84 दिन बाद भी दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अब भी इस रणनीतिक जलमार्ग पर मजबूत नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि दूसरी ओर ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक दबाव और निगरानी जारी है।

इस लंबे संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है। युद्ध से पहले हर दिन 120 से 140 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते थे। इनमें लगभग आधे तेल टैंकर होते थे, जो करीब 20 मिलियन बैरल तेल लेकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचते थे।

लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। वर्तमान में केवल चुनिंदा जहाजों को ही जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा रही है और बताया जा रहा है कि इसके लिए ईरान के साथ अलग-अलग स्तर पर समझौते किए जा रहे हैं।

24 घंटे में केवल 26 जहाजों को मिली अनुमति

ईरान ने बुधवार को दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान केवल 26 जहाजों के सुरक्षित आवागमन का समन्वय किया गया। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान ने हाल ही में “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” (PGSA) नामक नए निकाय के गठन की घोषणा की है।

इस संस्था का उद्देश्य जलडमरूमध्य में जहाजों की गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी अपडेट जारी करना बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस लगाने की व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की तैयारी कर रहा है।

जहाजों से वसूला जा रहा भारी शुल्क

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान जहाजों को होर्मुज पार कराने के बदले प्रति जहाज करीब 20 लाख डॉलर तक का शुल्क वसूल रहा है।

हालांकि कई पश्चिमी देशों और ईरान विरोधी गुटों ने इसे अवैध करार दिया है, लेकिन समुद्री व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक समुद्र में फंसे रहने और व्यापार ठप होने से होने वाले नुकसान की तुलना में यह शुल्क कई कंपनियों को कम महंगा लग रहा है।

दुनिया के तेल व्यापार पर बड़ा असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।

युद्ध से पहले यहां से प्रतिदिन लगभग 20.3 मिलियन बैरल तेल गुजरता था, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा था। इसका बड़ा भाग एशियाई देशों तक पहुंचता था।

लेकिन 4 मार्च को ईरान द्वारा जलमार्ग बंद किए जाने और जहाजों पर हमलों की घटनाओं के बाद यातायात लगभग ठप हो गया। इसके चलते दोनों ओर करीब 2,000 जहाज फंस गए।

तेल और गैस की कीमतों में उछाल

युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन जलडमरूमध्य बंद होने के बाद कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों के लिए बढ़ता खर्च, बीमा प्रीमियम और परिचालन लागत नई चुनौती बन गई है।



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