ट्रंप ने कहा, “हम दो महान देश हैं। मुझे लगता है कि इतिहास में इस मुलाकात को बहुत महत्वपूर्ण पल के तौर पर याद किया जाएगा।” उनके इस बयान के बाद दुनिया भर में G2 व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
शी जिनपिंग ने उठाया ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का मुद्दा
शिखर बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के सामने “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” का जिक्र किया। यह प्राचीन यूनानी सिद्धांत है, जिसके अनुसार उभरती हुई शक्ति और मौजूदा महाशक्ति के बीच अविश्वास और प्रतिस्पर्धा अक्सर युद्ध की ओर ले जाती है।
जिनपिंग ने सवाल किया कि क्या अमेरिका और चीन इस जाल से बचकर बड़े देशों के बीच सहयोग का नया मॉडल बना सकते हैं। इसे दोनों देशों के बीच “रणनीतिक स्थिरता” आधारित रिश्तों की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप ने पहले भी दिया था G2 का संकेत
चीन रवाना होने से पहले भी ट्रंप ने कहा था, “हम पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं और चीन दूसरे स्थान पर है।” उनकी इस टिप्पणी को भी G2 सोच का हिस्सा माना गया।
भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन मिलकर वैश्विक फैसलों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, तो भारत, ब्राजील और BRICS समूह के अन्य देशों की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी ग्लोबल साउथ देशों से निवेश और तकनीक को अमेरिका की ओर मोड़ सकती है। इससे विकासशील देशों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
यूरोप और एशिया में भी बेचैनी
लंदन स्थित SOAS चाइना इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर G2 व्यवस्था बनती है, तो दुनिया पर दो स्वार्थ केंद्रित ताकतों का प्रभाव बढ़ जाएगा। यूरोपीय देशों को भी डर है कि अमेरिका और चीन कई अहम वैश्विक फैसले बाकी देशों को दरकिनार कर ले सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, जापान, ब्राजील, यूरोप और आसियान देश ऐसी किसी व्यवस्था के पक्ष में नहीं होंगे, जिसमें वैश्विक फैसले उनके बिना लिए जाएं।