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बिहार में 72,287 शिक्षकों की नौकरी पर संकट, 90% से अधिक के सर्टिफिकेट नहीं मिले; विजिलेंस जांच तेज

Published on: December 19, 2025
Jobs for 72,287 teachers in Bihar

द देवरिया न्यूज़,बिहार : बिहार में सरकारी स्कूलों में कार्यरत 72,287 शिक्षकों की नौकरी पर फर्जी प्रमाणपत्रों की तलवार लटक रही है। राज्य सरकार ने इन शिक्षकों के शैक्षणिक, जाति और अन्य अनिवार्य प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच शुरू कराई है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक 69 हजार से अधिक शिक्षकों के प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। यह जांच विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (VIB) द्वारा की जा रही है।

प्रमाणपत्रों के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में दस्तावेज न मिलने पर विजिलेंस ब्यूरो ने जिलों के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तलब किया है और उनसे जवाब मांगा है।

2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों की जांच

शिक्षा विभाग के अनुसार, यह वेरिफिकेशन 2006 से 2015 के बीच रेगुलर टीचर सिस्टम के तहत नियुक्त शिक्षकों का किया जा रहा है। जांच के दायरे में—

  • शैक्षणिक प्रमाणपत्र

  • पेशेवर प्रशिक्षण (बीएड, बीटीसी आदि)

  • जाति और आय प्रमाणपत्र

  • दिव्यांग श्रेणी से जुड़े दस्तावेज

  • आधार से संबंधित कागजात

सभी प्रमाणपत्रों का बोर्ड, विश्वविद्यालय, जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया जा रहा है।

हाईस्कूल–इंटर पर सबसे ज्यादा संदेह

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 53,894 हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों पर सबसे अधिक संदेह जताया गया है। इसके अलावा 18,393 शिक्षकों के बीएड, बीटीसी, स्नातक, जाति और दिव्यांग प्रमाणपत्रों की भी जांच हो रही है।

बोर्ड स्तर पर जांच में शामिल हैं—

  • बिहार विद्यालय परीक्षा समिति: 46,681

  • संस्कृत बोर्ड: 1,763

  • मदरसा बोर्ड: 5,450

विश्वविद्यालयों के हजारों प्रमाणपत्र जांच के घेरे में

कई विश्वविद्यालयों के प्रमाणपत्रों को भी संदिग्ध माना गया है—

  • तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय: 666

  • मगध विश्वविद्यालय, बोधगया: 4,924

  • नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना: 114

  • पटना विश्वविद्यालय: 383

  • वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा: 2,296

  • ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा: 2,934

  • दूरस्थ शिक्षा संस्थान: 882

इसके अलावा कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय और बीएन मंडल विश्वविद्यालय के करीब 2,000 प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में हैं।

7 बार जांच के बाद भी नहीं हो पाई कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने स्वीकार किया है कि पहले 7 बार विभागीय स्तर पर जांच की जा चुकी है, लेकिन कई मामलों में प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता तय नहीं हो सकी। प्रशासनिक खामियों के चलते उस समय कार्रवाई नहीं हो पाई। अब यह जिम्मेदारी विजिलेंस ब्यूरो को दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, इस जांच के दौरान करीब 420 आपराधिक मामले दर्ज होने की संभावना है। अगस्त से अक्टूबर के बीच ही 106 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। हाल ही में नवादा, कटिहार और सारण जिलों में कई शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।

शिक्षा मंत्री का सख्त संदेश

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने साफ कहा है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा

  • फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर तत्काल बर्खास्तगी

  • अब तक मिली पूरी सैलरी ब्याज सहित वसूली

  • संबंधित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा

आंकड़ों में शिक्षा व्यवस्था

बिहार में वर्तमान में करीब 5.80 लाख शिक्षक लगभग 81 हजार स्कूलों में कार्यरत हैं। वर्ष 2006 से 2016 के बीच 3.68 लाख शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, जिनमें से करीब ढाई लाख शिक्षक योग्यता परीक्षा पास कर राज्यकर्मी बन चुके हैं।


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