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H-1B वीजा पर जेडी वेंस का बयान—धोखाधड़ी पर चिंता, लेकिन प्रवासियों के योगदान को भी सराहा

Published on: April 16, 2026
JD Vance's statement on H-1B visa
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा सिस्टम को लेकर अहम बयान दिया है, जिसमें उन्होंने एक तरफ इस प्रोग्राम में हो रही कथित गड़बड़ियों और धोखाधड़ी पर चिंता जताई, तो दूसरी ओर प्रवासियों के आर्थिक योगदान को भी स्वीकार किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों को लेकर बहस तेज है।
जेडी वेंस ने कहा कि H-1B वीजा प्रोग्राम तब सबसे बेहतर तरीके से काम करता है, जब इसके लाभार्थी अमेरिका की पहचान और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग इस वीजा के जरिए अमेरिका आते हैं, उन्हें खुद को अमेरिकी मानना चाहिए और देश के हित में सोचने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

वेंस ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि इस वीजा सिस्टम में कई खामियां भी हैं। उन्होंने कहा, “एक तरफ H-1B सिस्टम में काफी धोखाधड़ी होती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने अमेरिका आकर देश को समृद्ध बनाया है।” उन्होंने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके ससुराल पक्ष के लोग भी ऐसे ही प्रवासी हैं, जिन्होंने अमेरिका में आकर योगदान दिया है। जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस भारतीय मूल की हैं, जिनके माता-पिता आंध्र प्रदेश से अमेरिका जाकर बसे थे।
एक भारतीय मूल के छात्र के सवाल का जवाब देते हुए वेंस ने कहा कि अमेरिका में रहने वाले लोगों का कर्तव्य है कि वे अमेरिका के बारे में सोचें, न कि उस देश के बारे में जहां से वे आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए और देश की मुख्यधारा में पूरी तरह से शामिल होना चाहिए।
H-1B वीजा प्रोग्राम खासतौर पर भारतीयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर इस वीजा के जरिए अमेरिका जाकर आईटी, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा पाने वालों में 80 प्रतिशत से अधिक भारतीय और चीनी नागरिक होते हैं, जिनमें भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।
हालांकि, ट्रंप प्रशासन के दौरान वीजा नीतियों को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। सरकार ने H-1B वीजा के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। पिछले साल एक नए आदेश के तहत H-1B वीजा पर 1,00,000 डॉलर तक का शुल्क लगाया गया, जिससे इस प्रोग्राम को सीमित करने की कोशिश की गई।
इसके अलावा, दिसंबर से अमेरिकी विदेश विभाग ने H-1B और H-4 वीजा आवेदनों की जांच प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल तक की जांच की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
कुल मिलाकर, जेडी वेंस का यह बयान अमेरिका की इमिग्रेशन नीति के दो पहलुओं को उजागर करता है—एक तरफ सुरक्षा और पारदर्शिता की चिंता, और दूसरी तरफ प्रवासियों के आर्थिक योगदान की अहमियत।

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