Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

सऊदी अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नियोम’ पर संकट, फंड की कमी से मोहम्मद बिन सलमान की महत्वाकांक्षा को झटका

Published on: May 26, 2026
Saudi Arabia's dream project
द  देवरिया न्यूज़,रियाद : सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) का महत्वाकांक्षी ‘विजन-2030’ प्रोजेक्ट अब गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझता नजर आ रहा है। एक समय भविष्य की दुनिया का सपना माने जा रहे नियोम सिटी प्रोजेक्ट पर अब फंडिंग संकट गहराता दिख रहा है। विदेशी निवेश में कमी, तेल की कीमतों में गिरावट और बढ़ते बजट घाटे ने सऊदी अरब को अपने कई मेगा प्रोजेक्ट्स पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
करीब एक दशक पहले शुरू किए गए ‘विजन-2030’ का उद्देश्य सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालकर पर्यटन, टेक्नोलॉजी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में ले जाना था। इसी योजना के तहत नियोम सिटी का सपना सामने आया था, जिसमें रेगिस्तान के बीच 170 किलोमीटर लंबी भविष्यवादी शहर “द लाइन” बनाने की घोषणा की गई थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 500 अरब डॉलर बताई गई थी।
हालांकि अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कई हिस्सों को या तो रोक दिया गया है या उनका दायरा काफी छोटा कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, “द लाइन” प्रोजेक्ट के पहले चरण में अब केवल सीमित क्षेत्र के निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा, जिसे 2030 तक व्यापार और पर्यटन के लिए तैयार किया जा सके।
एमबीएस की योजना केवल आधुनिक शहर बनाने तक सीमित नहीं थी। इसमें रेगिस्तान के बीच स्की रिसॉर्ट, कृत्रिम झीलें, आलीशान होटल और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र विकसित करने का सपना भी शामिल था। सऊदी अरब 2029 एशियाई शीतकालीन खेलों की मेजबानी की तैयारी भी कर रहा था, लेकिन अब इन योजनाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई प्रोजेक्ट्स की समयसीमा अब 2035 या 2040 तक बढ़ाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक मंदी, यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने सऊदी अरब की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से सरकार की आमदनी पर असर पड़ा है। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब को अपने बड़े खर्चों को संतुलित करने के लिए कच्चे तेल की कीमत कम से कम 100 डॉलर प्रति बैरल चाहिए, जबकि मौजूदा बाजार में कीमतें इससे नीचे बनी हुई हैं।
विदेशी निवेशकों का भरोसा भी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाया है। मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों, क्षेत्रीय अस्थिरता और तानाशाही शासन की आलोचनाओं के कारण कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों ने दूरी बना ली है। नतीजतन, नियोम जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स में उम्मीद के मुताबिक निवेश नहीं आ सका।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी सरकार ने कई पश्चिमी कंसल्टेंसी और मैनेजमेंट कंपनियों के नए कॉन्ट्रैक्ट रोक दिए हैं और कुछ भुगतानों को भी होल्ड पर रखा गया है। वहीं, वैश्विक खेलों में अरबों डॉलर निवेश करने की रणनीति भी अब धीमी पड़ती दिख रही है। फुटबॉल, गोल्फ और बॉक्सिंग जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश के बावजूद सरकार अब खर्चों पर नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
सऊदी अरब का सॉवरेन वेल्थ फंड (PIF), जिसकी कुल संपत्ति करीब 1 ट्रिलियन डॉलर मानी जाती है, अब बजटीय दबाव का सामना कर रहा है। अनुमान है कि 2026 तक देश का बजट घाटा लगभग 44 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसे संभालने के लिए सऊदी अरब करीब 58 अरब डॉलर का कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है।
आर्थिक दबाव को देखते हुए सरकार भविष्य में वैट बढ़ाने, बिजली-पानी पर सब्सिडी कम करने और तेल उत्पादन में कटौती जैसे कदम उठा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि अब सऊदी अरब को अपने मेगा सपनों के बजाय व्यावहारिक आर्थिक फैसलों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

इसे भी पढ़ें : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर विपक्ष का हमला तेज, प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- ‘जनता त्रस्त, तेल कंपनियां मस्त’


Discover more from thedeoria.news : : Voice of rural India - ग्रामीण भारत की आवाज़

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

1 thought on “सऊदी अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नियोम’ पर संकट, फंड की कमी से मोहम्मद बिन सलमान की महत्वाकांक्षा को झटका”

Leave a Reply

error: Content is protected !!