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IMEC कॉरिडोर पर इजरायल ने बढ़ाई रफ्तार, होर्मुज के विकल्प के तौर पर तैयार हो रहा नया रास्ता

Published on: April 24, 2026
Israel on IMEC corridor
द  देवरिया न्यूज़,तेल अवीव : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता के बीच इजरायल ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) परियोजना को तेज करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि इस कॉरिडोर का उद्देश्य ईरान के प्रभाव को कम करना और वैश्विक व्यापार के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करना है।
IMEC एक बहु-देशीय परियोजना है, जो भारत को खाड़ी देशों, जॉर्डन और इजरायल के जरिए यूरोप से जोड़ती है। यह परियोजना ऐसे समय में अहम मानी जा रही है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।
इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, इस कॉरिडोर के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सकेगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि क्षेत्रीय तनावों का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर कम पड़े।

क्या है IMEC कॉरिडोर?

IMEC एक मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है, जिसमें समुद्री और रेल मार्ग दोनों शामिल हैं। इसके तहत भारत के पश्चिमी तट से यूएई तक समुद्री मार्ग, फिर सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल के जरिए रेल संपर्क और अंत में इजरायल से यूरोप तक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस परियोजना के दो प्रमुख हिस्से हैं—पूर्वी गलियारा, जो भारत को खाड़ी देशों से जोड़ेगा, और उत्तरी गलियारा, जो खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा। इस कॉरिडोर में केवल माल ढुलाई ही नहीं, बल्कि बिजली के केबल, हाइड्रोजन पाइपलाइन और हाई-स्पीड डेटा कनेक्टिविटी भी शामिल होगी।
इस परियोजना में भारत, अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ जैसे बड़े देश शामिल हैं। अनुमान है कि यह पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की तुलना में व्यापार समय में लगभग 40% और लॉजिस्टिक लागत में 30% तक की कमी ला सकता है।

भारत को क्या होगा फायदा?

IMEC के लागू होने से भारत के प्रमुख बंदरगाह—मुंद्रा, दीनदयाल, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कांडला और मोरमुगाओ—को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे भारत का यूरोप और पश्चिम एशिया के साथ व्यापार तेज और सस्ता हो सकेगा।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि इस परियोजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें सबसे बड़ी सऊदी अरब की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब अभी तक इस परियोजना को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहा है।
गौरतलब है कि इस परियोजना की घोषणा 7 अक्टूबर 2023 के हमलों से कुछ समय पहले हुई थी, लेकिन गाजा युद्ध के बाद इसकी प्रगति धीमी पड़ गई थी। अब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के चलते इसे फिर से गति देने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर IMEC परियोजना सफल होती है, तो यह वैश्विक व्यापार के नक्शे को बदल सकती है और पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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