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रूस ने Su-75 स्टील्थ फाइटर के प्रोटोटाइप पर शुरू किया काम, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर बढ़ी उम्मीदें

Published on: June 4, 2026
Russia launches Su-75 stealth fighter

द  देवरिया न्यूज़,मॉस्को : रूस के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-75 कार्यक्रम को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वादिम बडेखा ने पुष्टि की है कि विमान के पहले उड़ान योग्य प्रोटोटाइप पर काम शुरू हो चुका है। रूस ने पहली बार इस विमान को 2021 में दुनिया के सामने पेश किया था और अब इसकी परीक्षण उड़ान को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।

तय समयसीमा से पीछे चल रहा प्रोजेक्ट

Su-75 को शुरू में कम लागत वाले स्टील्थ लड़ाकू विमान के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। शुरुआती अनुमान के अनुसार इसकी पहली उड़ान 2023 के आसपास और सेवा में शामिल होने की संभावना 2026 तक जताई गई थी। हालांकि विभिन्न तकनीकी और वित्तीय कारणों से परियोजना में देरी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान रूस ने Su-57 कार्यक्रम से प्राप्त तकनीकी अनुभव और नई प्रणालियों को Su-75 के डिजाइन में शामिल किया है, जिसके कारण इसके मूल स्वरूप में भी बदलाव हुए हैं।

क्या है Su-75 की खासियत?

Su-75 को एक सिंगल-इंजन स्टील्थ फाइटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि रूस का मौजूदा Su-57 दो इंजनों वाला भारी लड़ाकू विमान है।

विमान की प्रमुख विशेषताएं:

  • पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ तकनीक
  • सिंगल-इंजन डिजाइन, जिससे परिचालन लागत कम होने की संभावना
  • उन्नत एवियोनिक्स और सेंसर सिस्टम
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पायलट सहायता प्रणाली
  • आंतरिक हथियार भंडारण (Internal Weapons Bay)
  • कम रखरखाव लागत का दावा

रूसी उद्योग सूत्रों के अनुसार, विमान में Su-57 से विकसित कई तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

F-35 और J-20 को टक्कर देने का दावा

रूस Su-75 को अमेरिकी F-35 Lightning II और चीन के J-20 के मुकाबले एक किफायती विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि विमान अभी विकास चरण में है और इसकी वास्तविक क्षमताओं का आकलन उड़ान परीक्षणों और भविष्य के संचालन के बाद ही संभव होगा।

निर्यात बाजार पर नजर

रूस का लक्ष्य Su-75 को वैश्विक रक्षा बाजार में ऐसे देशों के लिए उपलब्ध कराना है जो पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान चाहते हैं, लेकिन F-35 जैसे महंगे विकल्प नहीं खरीद सकते। विश्लेषकों का कहना है कि परियोजना की सफलता काफी हद तक विदेशी ग्राहकों पर निर्भर करेगी। यदि पर्याप्त निर्यात ऑर्डर मिलते हैं, तो कार्यक्रम को दीर्घकालिक आर्थिक समर्थन मिल सकता है।

भारत के साथ सहयोग की संभावना

रूस पहले भी संकेत दे चुका है कि वह भारत के साथ रक्षा उत्पादन सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूसी कंपनियां पहले MiG-21, MiG-27 और Su-30MKI जैसे कार्यक्रमों में साथ काम कर चुकी हैं।

हालांकि भारत की ओर से Su-75 खरीदने या संयुक्त उत्पादन को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भविष्य में अपनी आवश्यकताओं, लागत, तकनीकी हस्तांतरण और स्वदेशी परियोजनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेगा।

सफलता की राह अभी लंबी

हालांकि प्रोटोटाइप निर्माण शुरू होना कार्यक्रम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन Su-75 को अभी कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरना होगा। उड़ान परीक्षण, हथियार एकीकरण, स्टील्थ प्रदर्शन और परिचालन विश्वसनीयता जैसे पहलुओं पर सफलता मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रूस का यह नया लड़ाकू विमान वैश्विक बाजार में कितना प्रभाव छोड़ पाता है।

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