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डोडा-किश्तवार में बदली सेना की रणनीति, भीषण सर्दी में आतंकियों के खिलाफ तेज हुआ शीतकालीन अभियान

Published on: December 29, 2025
Army changed in Doda-Kishtwar
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के डोडा और किश्तवार जिलों में पहली बार रणनीति में बदलाव करते हुए शीतकालीन अभियानों को तेज कर दिया है। सबसे कठोर सर्दी के दौर में बचे हुए आतंकवादी गुटों को खत्म करने के उद्देश्य से घाटियों, मध्य पर्वतीय क्षेत्रों और ऊंचाई वाले इलाकों में एक साथ व्यापक तैनाती की गई है।
यह विशेष अभियान चिल्लई कलां के समय के साथ संचालित किया जा रहा है, जो 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक का सबसे ठंडा और चुनौतीपूर्ण मौसम माना जाता है। सेना का मकसद उन बर्फ से ढके दुर्गम इलाकों में सुरक्षा उपस्थिति मजबूत करना है, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी अब तक छिपने, ठहरने या घुसपैठ के लिए करते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सेना की इकाइयां ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में आक्रामक गश्त कर रही हैं ताकि सक्रिय आतंकियों को किसी भी तरह का सुरक्षित ठिकाना न मिल सके। इन अभियानों के लिए आधुनिक निगरानी तकनीक और विशेष शीतकालीन उपकरणों से लैस अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है। दुर्गम इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
सेना इन अभियानों में नागरिक प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, विशेष अभियान दल (एसओजी), वन विभाग और ग्राम रक्षा गार्ड्स (वीडीजी) के साथ मिलकर समन्वित कार्रवाई कर रही है। खुफिया नेटवर्क और जमीनी इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल से प्रतिक्रिया समय में काफी कमी आई है, जिससे मिलने वाले सुरागों पर तुरंत कार्रवाई संभव हो पाई है।
खुफिया आकलन के मुताबिक, जम्मू क्षेत्र में फिलहाल 30 से 35 आतंकवादी सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनमें से कई दबाव बढ़ने के कारण ऊंचे और मध्य पर्वतीय इलाकों में शरण लिए हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में आतंकियों द्वारा ग्रामीणों से जबरन भोजन और आश्रय मांगने की सूचनाएं भी सामने आई हैं।
नई रणनीति के तहत पहले जमीनी गश्त के जरिए इलाकों को सुरक्षित किया जा रहा है और उसके बाद लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि आतंकियों की दोबारा घुसपैठ या गतिविधियों को रोका जा सके। इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शीतकालीन युद्ध इकाइयों को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया है। ये जवान बर्फीले क्षेत्रों में संचालन, हिमस्खलन से निपटने और अत्यधिक ठंड में युद्ध कौशल में दक्ष हैं।
इसके अलावा सेना शीतकालीन ग्रिड को मजबूत करने के लिए ड्रोन आधारित टोही, जमीनी सेंसर, निगरानी रडार, थर्मल इमेजिंग उपकरण और अन्य आधुनिक मानवरहित प्रणालियों का भी व्यापक इस्तेमाल कर रही है। इन कदमों से आतंकवादियों पर दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

इसे भी पढ़ें : देवरिया में ठंड से बचाव की पहल: कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रैन बसेरों का किया रात्रिकालीन निरीक्षण


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