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भारत की नई चाय आयात नीति से नेपाल का चाय उद्योग संकट में, कई फैक्ट्रियां बंद

Published on: June 17, 2026
India's new tea import policy

द  देवरिया न्यूज़,काठमांडू : भारत की नई चाय आयात नीति और सख्त गुणवत्ता जांच नियमों के कारण नेपाल का चाय उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। भारतीय चाय बोर्ड द्वारा लागू किए गए नए गुणवत्ता मानकों और अनिवार्य परीक्षण प्रक्रिया के चलते नेपाली चाय का निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे पूर्वी नेपाल के कई जिलों में चाय फैक्ट्रियों का संचालन ठप होने लगा है।

नेपाली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाम जिले की 53 चाय फैक्ट्रियों ने 15 जून से उत्पादन बंद कर दिया है। वहीं झापा जिले की करीब 30 फैक्ट्रियों ने भी जल्द कामकाज रोकने की घोषणा की है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हजारों मजदूरों और किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

हजारों परिवारों की आजीविका पर खतरा

चाय उद्योग नेपाल के पूर्वी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अकेले झापा जिले में करीब 20 हजार मजदूर और किसान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। फैक्ट्रियों के बंद होने से उनके रोजगार और आय के स्रोत पर संकट गहरा गया है।

उद्योग से जुड़े संगठनों का दावा है कि 3 लाख किलोग्राम से अधिक नेपाली चाय भारतीय बाजार पहुंचने के बावजूद गुणवत्ता परीक्षण प्रक्रिया में फंसी हुई है। इसके अलावा 7 लाख किलोग्राम से अधिक प्रोसेस्ड चाय विभिन्न फैक्ट्रियों के गोदामों में बिना बिके पड़ी है।

भरे गोदाम, बढ़ती आर्थिक परेशानी

फैक्टरी संचालकों का कहना है कि निर्यात बाधित होने के कारण तैयार चाय की बिक्री नहीं हो पा रही है और गोदाम पूरी तरह भर चुके हैं। इससे किसानों से खरीदी गई हरी चाय पत्तियों का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया है।

सूर्योदय ऑर्थोडॉक्स टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिल्ली श्रेष्ठ ने कहा कि तैयार चाय की बिक्री नहीं होने के कारण फैक्ट्रियों का संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है।

उन्होंने कहा कि किसानों से खरीदी गई पत्तियों को प्रोसेस कर तैयार की गई चाय गोदामों में जमा है और भुगतान का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में फैक्ट्रियों को चालू रखना मुश्किल हो गया है।

भारत की नई गुणवत्ता जांच व्यवस्था

भारत के टी बोर्ड ने 1 मई से नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू की है। इसका उद्देश्य चाय में मिलावट और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं को रोकना बताया गया है।

नई व्यवस्था के तहत नेपाल से आने वाली हर चाय खेप की अनिवार्य गुणवत्ता जांच की जा रही है। नेपाली उत्पादकों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने में दो सप्ताह या उससे अधिक समय लग रहा है। इस दौरान चाय की खेप बाजार में नहीं बेची जा सकती।

यदि किसी सैंपल में निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नहीं पाई जाती, तो पूरी खेप को वापस करना पड़ता है या नष्ट करना पड़ता है, जिससे निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

चाय उत्पादन पर पड़ सकता है बड़ा असर

सूर्योदय नगरपालिका में लगभग 2,995 किसान चाय की खेती से जुड़े हैं। यहां करीब 33,655 रोपनी भूमि पर चाय का उत्पादन होता है और हर वर्ष लगभग 2 करोड़ किलोग्राम हरी चाय पत्तियां तैयार की जाती हैं।

नेपाली अधिकारियों के अनुसार, नेपाल हर साल 70 लाख किलोग्राम से अधिक ऑर्थोडॉक्स चाय का निर्यात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक चाय भारत के बाजार में जाती है। ऐसे में भारतीय आयात नियमों में हुए बदलाव का सीधा प्रभाव नेपाल के चाय उद्योग और उससे जुड़े हजारों परिवारों पर पड़ रहा है।

उद्योग जगत ने दोनों देशों की सरकारों से समाधान निकालने और निर्यात प्रक्रिया को सुगम बनाने की मांग की है, ताकि किसानों और मजदूरों के सामने खड़ा आर्थिक संकट टाला जा सके।


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