रविवार, 26 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एस्फहानी ने लिखा कि ईरान के बुनियादी ढांचे—जिसमें तेल के कुएं और ऊर्जा संसाधन शामिल हैं—को यदि किसी भी तरह की क्षति पहुंचती है, तो हमलावर का समर्थन करने वाले देशों को इसका कई गुना नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर हमारे तेल के कुएं या अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान होता है, तो हम गारंटी देते हैं कि संबंधित देशों को चार गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि ईरान का “गणित अलग” है और एक तेल का कुआं चार कुओं के बराबर माना जाएगा। इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि लगातार प्रतिबंधों और नाकाबंदी के कारण ईरान की तेल आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो ईरान की पाइपलाइनें तकनीकी या प्राकृतिक कारणों से फट सकती हैं। ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि यदि ईरान युद्धविराम चाहता है, तो वह अमेरिका से संपर्क कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर बना हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची कूटनीतिक प्रयासों के तहत रूस पहुंचे हैं, जहां उनकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात प्रस्तावित है। इससे पहले अराघची पाकिस्तान के दौरे पर भी गए थे, जहां उन्होंने आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की थी।
मौजूदा हालात को देखते हुए पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हुई हैं।