Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुप्रीम कोर्ट को दोबारा आपत्ति: जिला न्यायपालिका की सेवा शर्तों में हस्तक्षेप पर सवाल तेज

Published on: November 10, 2025
Supreme Court of Allahabad High Court

द देवरिया न्यूज़ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के उन प्रयासों पर आपत्ति जताई है, जिनके माध्यम से शीर्ष अदालत जिला न्यायपालिका की सेवा शर्तों और प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करती दिख रही है। यह विवाद नया नहीं है; इससे पहले 2022 में भी तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने हाईकोर्ट की ओर से सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया था। वेणुगोपाल का तर्क था कि संविधान सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के लिए डकेट प्रबंधन जैसे मामलों में प्रशासनिक निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं देता।

ताज़ा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मध्यस्थता पुरस्कार के क्रियान्वयन में हुई लंबी देरी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष मामले की समीक्षा करते हुए हाईकोर्ट को देरी कम करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप बनाने का निर्देश देना शुरू किया। यह प्रवृत्ति नई नहीं है—सालों से शीर्ष अदालत विभिन्न मुद्दों जैसे चेक बाउंस मामलों की लंबितता, आपराधिक अपील, जिला न्यायपालिका में रिक्तियों और न्यायिक ढांचे में सुधार जैसे क्षेत्रों में निर्देश जारी करती रही है।

कई बार ये निर्देश ‘प्रैक्टिस रूल्स’ अधिसूचित करने, किसी विशेष श्रेणी के मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने या मनमानी समय सीमाएं तय करने तक पहुंच जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट न केवल निर्देश जारी करता है बल्कि उनके अनुपालन की निगरानी भी करता है। इससे संवैधानिक अधिकार-क्षेत्र और न्यायिक अनुशासन पर बहस तेज हो गई है।

संवैधानिक प्रश्न

सबसे पहला मुद्दा संवैधानिक अधिकार-क्षेत्र का है। जिला न्यायपालिका में पदोन्नति, चयन और सेवा शर्तें संविधान के अनुसार हाईकोर्ट और राज्य सरकार के नियंत्रण में आती हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का इन प्रशासनिक क्षेत्रों में हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से सवालों में है। यहाँ तक कि सूचीबद्ध करने के मानदंडों पर निर्देश जारी करने का अधिकार भी सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट रूप से प्राप्त नहीं है।

नैतिक आधार पर सवाल

दूसरा बड़ा प्रश्न नैतिक अधिकार का है। स्वयं सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली में गंभीर देरी देखी गई है। 2011 के व्हाइट इंडस्ट्रीज केस में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में नौ वर्षों तक लंबित पड़े एक मामले पर टिप्पणी करते हुए भारत की देरी को संधि उल्लंघन बताया था। यह देरी भी उस 13 वर्ष की लंबितता से कम थी, जो खनिज कराधान मामले में दर्ज की गई।

सार्वजनिक परामर्श का अभाव

तीसरी समस्या यह है कि न्यायिक आदेशों के माध्यम से किए जाने वाले सुधार अक्सर बिना किसी सार्वजनिक या विशेषज्ञ परामर्श के लागू किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, न्यायिक सेवा के उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य तीन वर्ष का प्रैक्टिस अनुभव—यह आवश्यकता सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में हटाई, पर 22 साल बाद फिर बहाल कर दी, जबकि बीच की दो दशकों में हाईकोर्ट और बार काउंसिल लगातार गुणवत्ता पर चिंता जताते रहे।

टुकड़ों में सुधार का दुष्प्रभाव

चौथा मुद्दा यह है कि ऐसे हस्तक्षेप कई बार अन्य वादियों के साथ असमान व्यवहार पैदा कर देते हैं। यदि हाईकोर्ट को किसी विशेष श्रेणी—जैसे चेक बाउंस या आपराधिक अपील—को प्राथमिकता देने को कहा जाता है, तो बाकी मामलों में न्याय की गति स्वतः प्रभावित होती है। अदालत कक्ष की विरोधी प्रकृति नीति-निर्माण के अनुकूल नहीं होती, जिसका असर व्यापक जनता पर पड़ता है।


इसे भी पढ़ें : अमेरिका में दबोचे गए दो कुख्यात गैंगस्टर, भारत लाया जाएगा लॉरेंस बिश्नोई गैंग का भानु राणा

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Read Also

Khukhundu PHC of Deoria

देवरिया के खुखुंदू पीएचसी का डीएम ने किया औचक निरीक्षण, प्रभारी चिकित्साधिकारी मिले अनुपस्थित

Agriculture Minister Surya Pratap Shahi

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बघौचघाट थाने का किया औचक निरीक्षण, कानून-व्यवस्था पर दिए निर्देश

Basic Education Department in Deoria

देवरिया में बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक, डीएम ने शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के दिए निर्देश

Inauguration of Krishi Bhavan in Deoria

देवरिया में कृषि भवन का लोकार्पण, मंत्री सूर्य प्रताप शाही बोले- किसानों तक पारदर्शिता के साथ पहुंचे योजनाओं का लाभ

Kejriwal before Punjab elections

पंजाब चुनाव से पहले केजरीवाल का बड़ा हमला, बोले- ‘औरंगजेब की तरह मोदी ने भी कब्जा किया’

Owaisi on rising prices of cotton

सूत की बढ़ती कीमतों पर ओवैसी ने केंद्र से मांगा हस्तक्षेप, बोले- पावरलूम उद्योग गहरे संकट में

Leave a Reply