मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल राजपत्र (गैजेट) में प्रकाशित अधिसूचना के जरिए आयोग के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट किया गया है। इसके अनुसार आयोग का दायरा काफी विस्तृत है, जिसमें सरकारी कर्मचारी, राजनीतिक रूप से नियुक्त अधिकारी, प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों के प्रमुख एवं उप-प्रमुख शामिल हैं।
आयोग का गठन 15 अप्रैल को जांच आयोग अधिनियम, 1969 के तहत किया गया था। इसे मुख्य रूप से पूर्व अधिकारियों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। आयोग अपने पहले चरण में नेपाली सेना के पूर्व प्रमुखों और जनरलों के साथ-साथ वर्ष 2006 के बाद सेवा देने वाले न्यायाधीशों की संपत्ति की जांच पर फोकस करेगा।
हालांकि, फिलहाल सेवारत अधिकारियों को सीधे जांच के दायरे में नहीं रखा गया है। उनके खिलाफ यदि कोई शिकायत मिलती है तो उसे संबंधित संस्थाओं को भेजा जाएगा। आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, जांच के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है, हालांकि सटीक आंकड़ा अभी तय नहीं है।
आयोग के प्रवक्ता गणेश केसी ने बताया कि इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द ही जांच प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग के कार्यक्षेत्र (टर्म्स ऑफ रेफरेंस – TOR) को परिभाषित कर दिया है, जिससे जांच का दायरा और अधिक स्पष्ट और व्यापक हो गया है। इसमें मध्यम स्तर के पूर्व अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र कुमार भंडारी की अध्यक्षता में इस आयोग का गठन किया है। आयोग को शिकायतें आमंत्रित करने और जांच के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का अधिकार भी दिया गया है। इसके साथ ही संसदीय, स्वास्थ्य और मानवाधिकार सेवाओं से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
इस आयोग को काम शुरू होने की तारीख से एक वर्ष का समय दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद आयोग अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिस पर 45 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू करना अनिवार्य होगा। आयोग के कार्यकाल समाप्त होने या उसे भंग किए जाने की स्थिति में सभी दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण को सौंपे जाएंगे।
गणेश केसी के अनुसार, जमीनी स्तर पर आयोग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कर्मचारियों की नियुक्ति, बुनियादी ढांचे की व्यवस्था और प्रक्रियात्मक तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। जल्द ही सार्वजनिक नोटिस जारी कर जांच की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।
इस आयोग का दायरा बेहद व्यापक है, जिसमें देश के शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर रहे लोग शामिल हैं। ऐसे में इसे नेपाल में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसके प्रभाव और निष्कर्षों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।