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लक्ष्मी के साथ गणेश और सरस्वती की पूजा क्यों है जरूरी? जानिए दीपावली का गूढ़ अर्थ

Published on: October 17, 2025
Ganesha and Saraswati with Lakshmi
द देवरिया न्यूज़ : इस वर्ष 20 अक्टूबर को देशभर में दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार केवल रोशनी और खुशियों का नहीं, बल्कि धन, बुद्धि और ज्ञान के संतुलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।

क्यों की जाती है लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की संयुक्त पूजा

दीपावली की रात घर-घर में देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और देवी सरस्वती की भी पूजा होती है। इन तीनों देवताओं की उपासना का गहरा अर्थ है —
  • महालक्ष्मी धन और समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं,
  • गणेश बुद्धि और विघ्नविनाशक के प्रतीक हैं,
  • सरस्वती ज्ञान और विद्या की देवी हैं।
इन तीनों का संयुक्त पूजन यह संदेश देता है कि जीवन में धन (लक्ष्मी) तभी सार्थक होता है जब उसके साथ बुद्धि (गणेश) और ज्ञान (सरस्वती) का संतुलन हो। धन कमाने के साथ उसका विवेकपूर्ण उपयोग ही सच्ची समृद्धि का मार्ग है।

सिर्फ धन से नहीं मिलता सुख

शास्त्रों में कहा गया है कि केवल धन से सुख और शांति प्राप्त नहीं होती। यदि धन के साथ सही बुद्धि और ज्ञान न हो, तो वह लोभ और अहंकार का कारण बन सकता है।
भगवान गणेश विवेक और सही निर्णय का प्रतीक हैं, जो धन के सदुपयोग की दिशा दिखाते हैं, वहीं देवी सरस्वती ज्ञान का वह दीपक हैं जो अंधकार को मिटाता है।
महाभारत में भी भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यही शिक्षा दी थी कि “धन तभी शुभ है जब वह धर्म और ज्ञान के अनुसार प्रयुक्त हो।” इसीलिए दीपावली का वास्तविक संदेश केवल भौतिक संपन्नता नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संतुलन भी है।

विष्णु-लक्ष्मी का संयुक्त पूजन

शास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि लक्ष्मी जी की पूजा भगवान विष्णु के साथ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
विष्णु जी पुरुषार्थ और संतुलन के प्रतीक हैं। वे यह सिखाते हैं कि जीवन में धन का अर्जन और उपयोग धर्मसम्मत होना चाहिए। विष्णु पुराण में कहा गया है कि विष्णु-लक्ष्मी का संयुक्त पूजन धन, ज्ञान और पुरुषार्थ तीनों का संयोग स्थापित करता है।

दीपावली का संदेश

दीपावली केवल घरों को जगमगाने का पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को प्रकाशित करने का अवसर है।
लक्ष्मी की कृपा तभी स्थायी होती है जब वह गणेश की बुद्धि और सरस्वती के ज्ञान से जुड़ी हो। यही त्रिदेवता — धन, विवेक और विद्या — जीवन के संतुलन का मूलमंत्र हैं।
इस दीपावली, जब आप दीप जलाएं, तो केवल रोशनी के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाने और संतुलित जीवन की दिशा में बढ़ने के लिए जलाएं।

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