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बिहार में पीडीएस राशन वितरण पर AI की नजर, हर दाने का होगा डिजिटल हिसाब

Published on: January 5, 2026
PDS ration distribution in Bihar
द देवरिया न्यूज़,पटना। बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का सहारा लिया जाएगा। गरीबों को वितरित किए जाने वाले अनाज के प्रत्येक दाने का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे अनियमितताओं और गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी। इसके लिए राज्य की सभी 55,111 पीडीएस राशन दुकानों पर ई-पीओएस मशीनों को डिजिटल तराजू से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यही व्यवस्था 5,000 नई राशन दुकानों में भी लागू की जाएगी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों और उपमंडल अधिकारियों को नई राशन दुकानें खोलने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ई-पीओएस मशीनों और डिजिटल वजन मशीनों का एकीकरण लंबे समय से अपेक्षित सुधार था। इससे मैन्युअल त्रुटियां समाप्त होंगी और लाभार्थियों की पहचान वास्तविक समय में हो सकेगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक लाभार्थी को निर्धारित मात्रा में ही राशन मिले। इससे अनाज चोरी, कम तौल और फर्जी वितरण जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण होगा।

‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ को मिलेगा बल

“एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड” योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को बिना किसी देरी के राशन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत यदि कोई उचित मूल्य दुकान संचालक राशन देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, पात्रता संबंधी जानकारी हर दुकान पर बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि प्रवासी लाभार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

रीयल टाइम डेटा होगा रिकॉर्ड

नई प्रणाली के तहत हर लेनदेन के दौरान राशन का वजन वास्तविक समय में रिकॉर्ड होगा। राज्य भर की दुकानों से यह डेटा सीधे खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सर्वर पर पहुंचेगा। वितरित अनाज के साथ-साथ शेष स्टॉक का भी पूरा विवरण अपलोड किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की हेराफेरी को रोका जा सके।

AI से होगी निगरानी और पहचान 

एआई के जरिए इस डेटा का विश्लेषण किया जाएगा। जहां भी निर्धारित मात्रा से कम राशन वितरण होगा, उसकी जानकारी स्वतः नियंत्रण एवं कमांड सेंटर तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा, फिंगरप्रिंट न पढ़े जाने की शिकायतों को देखते हुए अब आइरिस स्कैन और चेहरे की पहचान (फेस रिकग्निशन) के जरिए भी लाभार्थियों की पहचान की व्यवस्था की जा रही है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन से वंचित न रह जाए।
इस नई तकनीकी व्यवस्था के लागू होने से बिहार की पीडीएस प्रणाली में पारदर्शिता, भरोसा और जवाबदेही तीनों में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद की जा रही है।

इसे भी पढ़ें : देवरिया में गोरखपुर रोड स्थित मजार पर कड़ी सुरक्षा, उर्स की अनुमति न मिलने पर आयोजन स्थगित


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