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अवध ओझा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोले- विपक्ष का काम सिर्फ हंसाना नहीं, देश को दिशा देना भी है

Published on: August 17, 2026
Awadh Ojha on Rahul Gandhi

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : जाने-माने शिक्षक और शिक्षाविद अवध ओझा ने कांग्रेस नेताओं की ओर से इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर की गई हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कार्यशैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी केवल सरकार पर सवाल उठाना या लोगों को हंसाना नहीं है, बल्कि देश के सामने एक स्पष्ट दिशा और वैकल्पिक सोच रखना भी है।

अवध ओझा ने कहा कि आज की जेन-जी पीढ़ी काफी समझदार है। युवा नेताओं की टिप्पणियों पर हंस सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे हर बात को गंभीरता से स्वीकार करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को हंसाना एक अलग भूमिका है, जबकि विपक्ष के नेता से देश को दिशा देने की अपेक्षा की जाती है।

राहुल गांधी से कुछ मुद्दों पर असहमति

अवध ओझा ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर आयोजित समारोह में कांग्रेस नेताओं की गैर-मौजूदगी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह राहुल गांधी से कुछ हद तक असहमत हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और एक समझदार व्यक्ति भी हैं, लेकिन राष्ट्रीय पर्व और राजनीतिक विचारधारा के बीच अंतर किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरे देश का राष्ट्रीय अवसर है। ओझा ने कहा कि राजनीतिक और वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन उन्हें दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए। राष्ट्रीय अवसरों पर सभी दलों के नेताओं को एक साथ खड़ा होने की जरूरत है।

‘लाल किले के समारोह में शामिल होना चाहिए था’

अवध ओझा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होना चाहिए था। उनके मुताबिक, यह किसी पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि देश की आजादी और लोकतांत्रिक विरासत से जुड़ा राष्ट्रीय आयोजन था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से जुड़े अवसरों पर एकता का संदेश जाना चाहिए।

पीएम मोदी के दूसरे नेताओं को गले लगाने पर क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों से गले मिलने को लेकर पूछे गए सवाल पर अवध ओझा ने कहा कि इसमें उन्हें कोई गलत बात नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के नेता एक-दूसरे से मुलाकात के दौरान इस तरह अभिवादन करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी पर अभिवादन या शारीरिक संपर्क के लिए दबाव नहीं होना चाहिए। आपसी सम्मान और सहमति जरूरी है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर भी दी राय

अवध ओझा ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवाओं का किसी नए राजनीतिक संगठन के रूप में सामने आना लोकतंत्र के लिहाज से सकारात्मक पहल हो सकती है। युवाओं में ऊर्जा, उत्साह और बदलाव की इच्छा होती है।

हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे युवा संगठनों को अनुभवी लोगों की मदद भी लेनी चाहिए। उनके अनुसार, पार्टी में एक दिशा-निर्देशक मंडल बनाया जा सकता है, जिसमें अनुभवी लोग युवाओं को राजनीतिक और संगठनात्मक मामलों में मार्गदर्शन दें।

युवाओं को अनुभव और ऊर्जा का संतुलन बनाना होगा

अवध ओझा ने कहा कि युवा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव के महत्वपूर्ण वाहक होते हैं। लेकिन केवल उत्साह से राजनीति को लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए संगठन, नीति, अनुभव और स्पष्ट दिशा की भी जरूरत होती है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने विचारों को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाएं और राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलने से बचें। उनके मुताबिक, देश की राजनीति में स्वस्थ बहस और वैकल्पिक विचार लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।


इसे भी पढ़ें : तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी अरब बनाएंगे नया रक्षा तंत्र, NATO जैसा होगा सामूहिक सुरक्षा मॉडल


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