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सिंधु जल संधि और चिनाब परियोजनाओं पर पाकिस्तान की आपत्ति, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दी चेतावनी

Published on: June 21, 2026
Indus Water Treaty and Chenab

द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा है कि यदि पाकिस्तान को यह महसूस हुआ कि भारत उसकी जल सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है या नदियों के पानी को रोकने के लिए परियोजनाओं का इस्तेमाल कर रहा है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि, भारत की ओर से इस संबंध में कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पानी को बताया जीवन का आधार

पाकिस्तानी चैनल ARY News को दिए गए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पानी किसी भी देश के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी जल सुरक्षा को लेकर संवेदनशील है और इस विषय पर किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से देखता है।

आसिफ ने दावा किया कि अतीत में सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को भारत की कुछ जल परियोजनाओं का निरीक्षण करने का अवसर मिलता रहा है, लेकिन हाल के समय में उसे पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है।

पीओके में प्रदर्शनों पर भी भारत पर आरोप

एक अन्य बयान में ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी भारत पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी समूह और उनके समर्थक भारत के हितों को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है और भारत ने भी इन दावों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लिखा गया पत्र

इस बीच पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को पत्र लिखकर भारत द्वारा कथित रूप से सिंधु जल संधि के उल्लंघन का मुद्दा उठाया है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिकार अहमद ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को यह पत्र सौंपा है। पत्र में विशेष रूप से चिनाब नदी से संबंधित भारत की कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चिंता व्यक्त की गई है।

सिंधु जल संधि क्या है?

सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे एवं उपयोग को नियंत्रित करती है।

यह समझौता दशकों तक दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का आधार रहा है और कई राजनीतिक एवं सैन्य तनावों के बावजूद लागू रहा है।

क्षेत्रीय तनाव पर नजर

भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों से जुड़े मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है और इससे जुड़े किसी भी विवाद का समाधान कूटनीतिक और कानूनी माध्यमों से किया जाना चाहिए।

फिलहाल पाकिस्तान ने अपनी चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है, जबकि भारत की ओर से इस विषय पर आगे की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।


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