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अमरीश कुमार जैन मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- जज किसी भी हालत में सुनवाई से अलग न हों

Published on: June 19, 2026
In Amrish Kumar Jain case

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित एक मामले में बार-बार जजों के खुद को सुनवाई से अलग करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। पूर्व न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

2022 से लंबित है मामला

अमरीश कुमार जैन ने अपनी सेवा से हटाए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए वर्ष 2022 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन अब तक इस मामले में चार जज खुद को सुनवाई से अलग कर चुके हैं, जिनमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट से केस ट्रांसफर की मांग

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जैन ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए मामले को दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया जाए।

जैन का तर्क था कि लगातार जजों के अलग होने से यह संकेत मिलता है कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उनकी याचिका की सुनवाई को लेकर संस्थागत कठिनाई उत्पन्न हो गई है।

सीजेआई की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से एक नई पीठ गठित करने का अनुरोध किया जाएगा।

उन्होंने कहा,

“यदि कोई वकील या पक्षकार किसी जज को मामले से अलग होने के लिए मजबूर करने की कोशिश करता है, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।”

सीजेआई ने कुछ वरिष्ठ वकीलों के आचरण पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत में ऐसी परिस्थितियां पैदा करना उचित नहीं है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो।

रोजाना सुनवाई का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश दो जजों की एक डिवीजन बेंच गठित करें और यह सुनिश्चित किया जाए कि जज किसी भी स्थिति में सुनवाई से अलग न हों।

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि:

  • सुनवाई 13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह से शुरू की जाए।
  • मामले की दैनिक आधार पर सुनवाई हो।
  • फैसला सुरक्षित होने तक प्रक्रिया लगातार जारी रखी जाए।

अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को फिलहाल लंबित रखा है और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि जब डिवीजन बेंच फैसला सुरक्षित कर ले, तब उसकी अनुपालन रिपोर्ट शीर्ष अदालत में प्रस्तुत की जाए।

किन जजों ने सुनवाई से खुद को अलग किया?

मामले में अब तक जिन न्यायाधीशों ने स्वयं को सुनवाई से अलग किया, उनमें शामिल हैं:

  • जस्टिस लिसा गिल (2 सितंबर 2024)
  • तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा था, लेकिन बाद में मामला पुनः सूचीबद्ध किया गया।
  • जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा (25 मार्च 2025)
  • जस्टिस दीपक सिब्बल (14 मई 2025)

सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी को न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और बार-बार होने वाले रिक्यूज़ल (सुनवाई से अलग होने) के मामलों पर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।



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