द देवरिया न्यूज़,ब्रसेल्स : यूरोपीय संघ (EU) ने यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में रूस पर नए प्रतिबंधों का प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज में रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे, ऊर्जा क्षेत्र और वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाने के साथ-साथ उन विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिन पर रूस को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने का आरोप है। रिपोर्टों के अनुसार, इस सूची में भारत, चीन समेत कई देशों की कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि नए प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता और उसके वित्तीय संसाधनों को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रहा है।
50 विदेशी कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण का प्रस्ताव
प्रस्तावित पैकेज के तहत भारत, चीन, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की करीब 50 कंपनियों पर अतिरिक्त निर्यात नियंत्रण लगाने की सिफारिश की गई है। हालांकि यूरोपीय संघ ने अभी तक उन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जो इस सूची में शामिल हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, इन कंपनियों पर आरोप है कि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस के सैन्य या औद्योगिक क्षेत्र को सामान, तकनीक या सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कंपनियों की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा क्षेत्र पर भी फोकस
काजा कल्लास के अनुसार, प्रस्तावित प्रतिबंधों में रूस के बैंकिंग नेटवर्क, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कुछ संस्थानों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा रूस के ऊर्जा क्षेत्र और ड्रोन निर्माण क्षमता को प्रभावित करने वाले उपाय भी पैकेज का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ उन व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रहा है, जो रूस की सैन्य गतिविधियों को समर्थन देने में भूमिका निभा रहे हैं।
अभी अंतिम मंजूरी बाकी
यूरोपीय संघ का यह पैकेज फिलहाल केवल एक प्रस्ताव है। इसे लागू होने से पहले EU के सभी सदस्य देशों की मंजूरी प्राप्त करनी होगी। सदस्य देशों के बीच सहमति बनने के बाद ही प्रतिबंध प्रभावी होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित उपायों को मंजूरी मिलती है तो इसका असर कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और व्यापारिक नेटवर्क पर पड़ सकता है।
पहले भी भारतीय कंपनियां आ चुकी हैं दायरे में
यह पहला अवसर नहीं है जब भारतीय कंपनियों का नाम यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों से जुड़ा हो। इससे पहले भी रूस से संबंधित प्रतिबंधों के कुछ पैकेजों में भारतीय कंपनियों पर कार्रवाई की गई थी। हालांकि भारतीय पक्ष लगातार यह कहता रहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप व्यापारिक एवं कूटनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाता है।
फिलहाल सभी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यूरोपीय संघ के सदस्य देश इस प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज पर क्या फैसला लेते हैं और इसमें शामिल कंपनियों की अंतिम सूची क्या होती है।
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1 thought on “रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज की तैयारी में यूरोपीय संघ, भारतीय कंपनियां भी दायरे में आने की आशंका”