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पासपोर्ट पर विवाद: ओवैसी ने केंद्र सरकार को घेरा, पूछा- नागरिकता साबित करने के लिए फिर कौन सा दस्तावेज चाहिए?

Published on: June 26, 2026
Controversy over passport Owaisi to Centre

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/हैदराबाद : विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के “पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है” वाले बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और नागरिकता संबंधी नियमों को लेकर कई सवाल उठाए।

ओवैसी का सवाल- नागरिकता का प्रमाण क्या है?

हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि यदि पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट), आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जाते, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए आखिर कौन सा दस्तावेज मान्य होगा?

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के मन में इस प्रकार के बयानों से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

पासपोर्ट एक्ट का हवाला देकर उठाए सवाल

ओवैसी ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के अनुसार भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है।

उन्होंने दावा किया कि यदि किसी व्यक्ति को भारतीय पासपोर्ट जारी किया गया है, तो यह उसकी नागरिकता से जुड़ी महत्वपूर्ण पहचान है। ओवैसी ने कहा कि यदि सरकार भविष्य में ऐसे दस्तावेजों को भी पर्याप्त नहीं मानेगी, तो लोगों के अधिकारों पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

बीजेपी सदस्यता कार्ड पर तंज

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने केंद्र सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण केवल किसी राजनीतिक दल की सदस्यता को माना जाने लगे।

उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है और अकेले इसे नागरिकता का अंतिम और पूर्ण प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का उपयोग अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए किया जाता है, जबकि विभिन्न सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए अन्य दस्तावेजों की भी आवश्यकता हो सकती है।

कानूनी स्थिति क्या कहती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट आम तौर पर भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में भारत सरकार कुछ गैर-नागरिक व्यक्तियों को आइडेंटिटी सर्टिफिकेट या अन्य यात्रा दस्तावेज भी जारी कर सकती है।

इसी आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 के एक फैसले में कहा था कि केवल पासपोर्ट का होना अपने आप में नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक बहस तेज

विदेश मंत्रालय के अधिकारी के बयान के बाद विपक्षी दल सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक रूप ले चुकी है और आने वाले दिनों में इस पर और चर्चा होने की संभावना है।


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