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पीतल नक्काशी के महारथी चिरंजी लाल यादव को मिला पद्मश्री, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

Published on: June 25, 2026
Chiranji, master of brass carving

द  देवरिया न्यूज़,मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की पारंपरिक पीतल नक्काशी कला को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले प्रसिद्ध शिल्पकार चिरंजी लाल यादव को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित सिविल इन्वेस्टिचर सेरेमनी-II के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

चिरंजी लाल यादव को कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान, पीतल और कांसा नक्काशी की विरासत को संरक्षित करने तथा हजारों कारीगरों को प्रशिक्षित करने के लिए सम्मानित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल मुरादाबाद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प जगत में खुशी की लहर है।

गरीब परिवार से निकलकर बने देश के प्रतिष्ठित शिल्पकार

मुरादाबाद के कोतवाली क्षेत्र स्थित गुरहट्टी मोहल्ले के निवासी चिरंजी लाल यादव का जन्म एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ था। उनके पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे केवल सातवीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर सके।

कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना शुरू कर दिया। इसी दौरान उन्होंने पीतल और कांसा नक्काशी की कला सीखनी शुरू की। बताया जाता है कि किशोरावस्था में ही उन्होंने इस कला में महारत हासिल कर ली और फिर अपना पूरा जीवन इसके संरक्षण और विकास के लिए समर्पित कर दिया।

पांच दशकों से कला साधना में जुटे

चिरंजी लाल यादव पिछले लगभग 50 वर्षों से अधिक समय से पीतल और कांसा नक्काशी की कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। उनकी बारीक कारीगरी और जीवंत नक्काशी ने मुरादाबाद की हस्तकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशेष पहचान दिलाई है।

उनके बनाए कलात्मक उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सराहे जाते हैं। उनकी कला पारंपरिक भारतीय शिल्पकला और आधुनिक डिजाइनों का सुंदर संगम मानी जाती है।

गुरु-शिष्य परंपरा से हजारों कारीगरों को दिया प्रशिक्षण

चिरंजी लाल यादव की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है कि उन्होंने अपनी कला को केवल अपने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से हजारों युवाओं और कारीगरों को प्रशिक्षण दिया।

उनकी मेहनत और मार्गदर्शन से अनेक लोगों को रोजगार मिला और मुरादाबाद की पारंपरिक नक्काशी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिली। इससे स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को भी मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी बधाई

पद्मश्री सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिरंजी लाल यादव को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि:

“पिछले पांच दशकों से ‘कांसा नक्काशी’ की समृद्ध कला को संरक्षित करने, संवारने और उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में आपका योगदान अमूल्य और प्रेरणादायक है। आपकी यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाने वाली है।”

उत्तर प्रदेश की कला परंपरा को मिली नई पहचान

चिरंजी लाल यादव को मिला पद्मश्री सम्मान उत्तर प्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और मुरादाबाद की प्रसिद्ध पीतल उद्योग के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों और शिल्पकारों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

प्रमुख तथ्य:

  • नाम: चिरंजी लाल यादव
  • निवास: गुरहट्टी, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • क्षेत्र: पीतल एवं कांसा नक्काशी कला
  • अनुभव: लगभग 50 वर्ष
  • सम्मान: पद्मश्री 2026
  • विशेष योगदान: हजारों कारीगरों को प्रशिक्षण, भारतीय हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाना

चिरंजी लाल यादव की यह उपलब्धि साबित करती है कि समर्पण, मेहनत और कला के प्रति लगन किसी भी साधारण व्यक्ति को असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।


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