द देवरिया न्यूज़,देवरिया। होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया (38) का पार्थिव शरीर बुधवार शाम करीब 6 बजे उनके पैतृक गांव पहुंचा। शव के पहुंचते ही गांव में मातम छा गया। पत्नी, बहन और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पत्नी और बहन बेहोश हो गईं, जबकि माता-पिता और भाई गहरे सदमे में नजर आए।
परिजनों ने शव को एम्बुलेंस से उतारने से इनकार कर दिया और मुख्यमंत्री से बातचीत की मांग पर अड़ गए। सूचना मिलने पर डीएम मधुसूदन हुल्गी और एसपी अभिजीत आर. शंकर मौके पर पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। शिवानंद की पत्नी ने अधिकारियों को मांग-पत्र सौंपा। डीएम ने आश्वासन दिया कि परिवार की सभी जायज मांगों पर शासन स्तर पर कार्रवाई कराई जाएगी।
करीब चार घंटे की बातचीत के बाद रात 10 बजे शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा।
परिजनों की दो प्रमुख मांगें
परिवार ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं—
- एक करोड़ रुपये का मुआवजा
- शिवानंद की पत्नी को सरकारी नौकरी
राहुल गांधी ने की परिजनों से बात
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने फोन पर शिवानंद की पत्नी और छोटे भाई रामप्रवेश से बातचीत कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवार की मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और आर्थिक सहायता के लिए भी पत्र लिखा जाएगा।
बातचीत के दौरान रामप्रवेश ने बताया कि जिस जहाज पर शिवानंद काम कर रहे थे, उस पर मिसाइल गिरने से उनकी मौत हो गई। राहुल गांधी ने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
कांग्रेस और सपा नेताओं का दौरा
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, जिलाध्यक्ष विजय शेखर मल्ल और अन्य नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सुरौली पहुंचा और परिजनों से मुलाकात की। लल्लू ने सरकार से शिवानंद को शहीद का दर्जा, एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि शिवानंद की नौकरी के लिए लिया गया कर्ज सरकार द्वारा चुकाया जाना चाहिए।
परिवार के इकलौते कमाने वाले थे शिवानंद
शिवानंद चौरसिया की शादी वर्ष 2017 में सुशीला देवी से हुई थी। उनके दो छोटे बच्चे हैं—पांच वर्षीय बेटा राजवीर और दो वर्षीय बेटी वानिका। परिवार में माता-पिता, पत्नी, भाई और बच्चे हैं।
पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि शिवानंद ने रोजगार की तलाश में कई शहरों में काम किया और बाद में मर्चेंट नेवी का प्रशिक्षण लिया। समुद्री जहाज पर नौकरी के लिए आवश्यक सीडीसी (Continuous Discharge Certificate) बनवाने में करीब छह लाख रुपये खर्च हुए, जिसके लिए परिवार ने कर्ज लिया था।
सितंबर 2025 में शिवानंद सिंगापुर पहुंचे और एक शिपिंग कंपनी के तेल टैंकर जहाज पर इंजन फिटर के रूप में कार्य शुरू किया। यह उनकी पहली समुद्री यात्रा थी, जो दुर्भाग्यवश आखिरी साबित हुई।
10 जून को हुई थी मौत
परिजनों के अनुसार, 10 जून को होर्मुज स्ट्रेट के पास हुए अमेरिकी हमले में शिवानंद की मौत हो गई थी। 12 जून को परिवार को घटना की सूचना मिली। इसके बाद पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई और बुधवार को शव उनके गांव पहुंचा।
गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए शिवानंद के घर पहुंच रहे हैं।
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