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ड्रोन युद्ध ने बदली दुनिया की रणनीति: ताइवान बन रहा नया ‘ड्रोन सुपरपावर’

Published on: March 20, 2026
Drone war changed the world
द  देवरिया न्यूज़,ताइपे : ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में विस्फोटक ड्रोन की बढ़ती भूमिका ने दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। खाड़ी क्षेत्र में हमलों के दौरान ड्रोन तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल ने पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता पर भी सवाल खड़े किए हैं। इसी पृष्ठभूमि में अब ताइवान तेजी से उभरते हुए “ड्रोन सुपरपावर” के रूप में सामने आ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइवान ने पिछले कुछ समय में बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक से ड्रोन निर्माण को बढ़ावा दिया है। शुरुआत में इसे एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन अब यह देश की रक्षा और रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा बन चुका है। ताइवान ने बीते एक साल में बड़ी संख्या में ड्रोन का उत्पादन किया है और यूक्रेन को भी निर्यात किया है, जो रूस के साथ युद्ध में इनका इस्तेमाल कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व के संघर्षों ने यह दिखाया है कि कम लागत वाले लेकिन प्रभावी ड्रोन बड़े सैन्य ढांचे को चुनौती दे सकते हैं। इसी कारण कई देश अब अपनी ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
ताइवान ने ‘Teng Yun II’ जैसे मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन विकसित किए हैं। इसके अलावा ‘Chien Hsiang’ जैसे कामिकाजी ड्रोन भी बनाए गए हैं, जो निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सटीक हमलों में सक्षम हैं। ये ड्रोन आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान के लिए ड्रोन तकनीक केवल निर्यात का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा का अहम हिस्सा भी है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और लगातार दबाव बनाता रहा है। ऐसे में ताइवान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ड्रोन उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है।
ताइवान का लक्ष्य है कि वह साल 2030 तक हर साल करीब 1.8 लाख ड्रोन का उत्पादन करे। इसके लिए देश में करीब 260 कंपनियां ड्रोन के विभिन्न हिस्सों और सिस्टम के निर्माण में लगी हुई हैं।
ताइवान न केवल खुद के लिए, बल्कि अपने सहयोगी देशों के लिए भी ड्रोन का एक वैकल्पिक स्रोत बनकर उभर रहा है। खासतौर पर वे देश, जो चीनी तकनीक पर निर्भरता कम करना चाहते हैं, ताइवान की ओर देख रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ताइवान का यह उभरता हुआ ड्रोन उद्योग भारत जैसे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत और ताइवान के बीच बढ़ते सहयोग के चलते भविष्य में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं।

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