द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी की युवा रणनीति और राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को लेकर आत्ममंथन की जरूरत बताई है। उन्होंने माना कि इस अभियान को छात्रों से उतना समर्थन नहीं मिला, जितनी उम्मीद की जा रही थी। थरूर ने कहा कि कांग्रेस को यह गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आखिर वह युवाओं तक अपनी बात प्रभावी तरीके से पहुंचाने में कहां चूक गई।
‘हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए’
एक इंटरव्यू के दौरान शशि थरूर से राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या इस अभियान को छात्रों का उतना समर्थन नहीं मिला, जितना जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन को मिला था। इस पर थरूर ने कहा कि यह बात सही है और इसी वजह से कांग्रेस को खुद से सवाल पूछने की जरूरत है कि पार्टी क्या नहीं कर पाई।
उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी राजनीतिक अभियान की सफलता केवल कार्यक्रम आयोजित करने से तय नहीं होती, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि वह अभियान युवाओं की वास्तविक चिंताओं और अपेक्षाओं से कितना जुड़ पाता है।
‘क्या हम छात्रों की बात सुनने में नाकाम रहे?’
थरूर ने कांग्रेस की रणनीति पर आत्ममंथन करते हुए सवाल उठाया कि कहीं पार्टी छात्रों की बात को सही तरीके से सुनने और समझने में तो नाकाम नहीं रही।उन्होंने राजनीति में लोगों की नब्ज समझने की जरूरत का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को यह पता लगाना होगा कि वह युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में कहां पीछे रह गई।
उनकी टिप्पणी को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि आने वाले समय में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनके मुद्दे चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘क्या कांग्रेस Gen Z की नब्ज पकड़ पाई?’
शशि थरूर ने खास तौर पर Gen Z को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस नई पीढ़ी की नब्ज पकड़ने में सफल रही है। Gen Z के बीच सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक संवाद का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में पारंपरिक राजनीतिक अभियानों के बजाय युवाओं की भाषा और उनके डिजिटल व्यवहार को समझना राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। थरूर का बयान इसी बदलती राजनीतिक जरूरत की ओर इशारा करता है।
IIMUN की 15वीं सालगिरह पर बोले थरूर
शशि थरूर ने ये बातें ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) की 15वीं सालगिरह के मौके पर कहीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं की भागीदारी और उनके साथ राजनीतिक संवाद से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में युवाओं और छात्रों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी की युवा रणनीति पर बढ़ी चर्चा
थरूर की टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि यह आलोचना किसी विपक्षी दल की ओर से नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर से आई है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी या अभियान की आलोचना करने के बजाय पार्टी को आत्ममंथन करने की सलाह दी है।
अब सवाल यह है कि कांग्रेस इस फीडबैक को अपनी भविष्य की रणनीति में किस तरह शामिल करती है। खासकर Gen Z और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए पार्टी को अपने अभियान, संवाद के तरीके और मुद्दों की प्राथमिकता में बदलाव करना होगा या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फिलहाल थरूर का सवाल—‘क्या हम Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रहे?’—कांग्रेस की युवा राजनीति को लेकर नई बहस जरूर छेड़ चुका है।
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