द देवरिया न्यूज़,संभल : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की सरकारी और ग्राम सभा की भूमि से जुड़े चर्चित घोटाले की जांच अब अहम चरण में पहुंच गई है। करीब 38 बीघा सरकारी जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण और कब्जे के मामले में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजकुमार गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि मामला केवल अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी अभिलेखों में नामांतरण कराने, न्यायालय में लंबित मुकदमे को वापस लेने तथा सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम कराने जैसी गंभीर अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है।
1967 के कथित फर्जी पट्टे से शुरू हुई पूरी प्रक्रिया
पुलिस के अनुसार, संभल-मुरादाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित ग्राम तख्तगुशाईन की लगभग 2.367 हेक्टेयर (करीब 38 बीघा) ग्राम सभा और नगर पालिका की भूमि इस पूरे मामले का केंद्र है। आरोप है कि 12 जुलाई 1967 की तारीख का एक कथित फर्जी पट्टा तैयार किया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर 15 फरवरी 2008 को तत्कालीन उप संचालक चकबंदी के आदेश से सईदुल रहमान के पक्ष में नामांतरण दर्ज कर दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके बाद सरकारी जमीन पर कब्जा करने का रास्ता आसान हो गया।
हाईकोर्ट से याचिका वापस लेना बना जांच का अहम बिंदु
नगर पालिका ने नामांतरण के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता द्वारा याचिका वापस लेने के बाद सरकारी पक्ष की कानूनी कार्रवाई समाप्त हो गई। पुलिस और जांच एजेंसियां इस निर्णय को पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मान रही हैं। आरोप है कि याचिका वापस लेने का फैसला कथित मिलीभगत और निजी हितों को ध्यान में रखकर लिया गया, जिससे सरकारी जमीन पर प्रशासन का दावा कमजोर पड़ गया।
32 नामजद आरोपी, कई अधिकारी जांच के घेरे में
इस मामले में पूर्व ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया जा चुका है। दर्ज एफआईआर में तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर चकबंदी (डीडीसी) खेम सिंह खड़क, सेवानिवृत्त मानचित्रकार शाहबुद्दीन, पैरोकार माजिद खान सहित 32 नामजद आरोपियों तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष से जुड़े कुछ लोगों, राजस्व विभाग के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
सरकारी खाते में दर्ज होगी विवादित जमीन
जिलाधिकारी के निर्देश पर विवादित भूमि को दोबारा सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने और अवैध कब्जे से मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
एसपी बोले- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि सरकारी संपत्ति से जुड़े इस प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस कथित भूमि घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में नए खुलासों और अतिरिक्त गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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