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ट्रंप-मोदी मुलाकात से क्या बदलेंगे भारत-अमेरिका संबंध? फरीद जकारिया के बयान पर कंवल सिब्बल का पलटवार

Published on: June 28, 2026
What will change with the Trump-Modi meeting

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/वॉशिंगटन : फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगभग 16 महीने बाद हुई मुलाकात ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि, भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार और विदेश नीति विश्लेषक फरीद जकारिया का मानना है कि इस मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है। वहीं, उनके इस आकलन पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

फरीद जकारिया: भारत को अमेरिका की जरूरत ज्यादा

सीएनएन-न्यूज़18 से बातचीत में फरीद जकारिया ने कहा कि वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य में भारत और अमेरिका के संबंधों का संतुलन बदल रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले क्वाड (QUAD) में भारत को हिचकिचाने वाला साझेदार माना जाता था, लेकिन अब वही स्थिति अमेरिका की दिखाई दे रही है।

जकारिया के अनुसार,

“अमेरिका को भारत की जितनी जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा भारत को अमेरिका की जरूरत है।”

उनका कहना है कि ट्रंप और मोदी की हालिया मुलाकात से रिश्तों में किसी बड़े बदलाव के संकेत फिलहाल नहीं दिखाई देते।

‘ट्रंप को तारीफ करने वाले नेता पसंद’

फरीद जकारिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वभाव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रंप ऐसे नेताओं की ओर अधिक आकर्षित होते हैं जो उनकी खुलकर प्रशंसा करते हैं। जकारिया का दावा है कि इसी वजह से पाकिस्तान के नेतृत्व, विशेषकर सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर, के प्रति ट्रंप का रुझान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए चुनौती बन सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति पहले जैसा व्यक्तिगत आकर्षण अब दिखाई नहीं देता।

कंवल सिब्बल ने किया पलटवार

फरीद जकारिया के बयान पर भारत के पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कहना कोई नई बात नहीं है कि भारत को अमेरिका की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह बात दुनिया के अधिकांश देशों पर लागू नहीं होती? सिब्बल ने लिखा कि डोनाल्ड ट्रंप ने केवल भारत ही नहीं बल्कि कई मित्र देशों के साथ भी सख्त रवैया अपनाया है।

‘ट्रंप ने कई देशों को नाराज किया’

कंवल सिब्बल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कई देशों पर टैरिफ लगाए, अंतरराष्ट्रीय समझौतों से बाहर निकलने का फैसला किया और संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) समेत कई वैश्विक संस्थाओं के प्रति भी कठोर रुख अपनाया।

उन्होंने कहा,

“ट्रंप अलग तरह के नेता हैं। वह कई देशों पर दबाव बनाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि दुनिया को अमेरिका की जरूरत ज्यादा है।”

सिब्बल ने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों ने अमेरिकी दबाव के बावजूद उसके साथ संबंध बनाए रखे हैं।

जी-7 सम्मेलन में हुई थी मोदी-ट्रंप मुलाकात

फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीने बाद आमने-सामने मुलाकात हुई। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब हाल के महीनों में व्यापार, टैरिफ और कुछ कूटनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद देखने को मिले थे।

हालांकि, विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ इसे संबंधों में नई शुरुआत मान रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि वास्तविक बदलाव आने में अभी समय लग सकता है।


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