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UAE को ब्रह्मोस और आकाशतीर बेचने पर भारत की नजर, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी चर्चा

Published on: June 25, 2026
BrahMos and Akashteer to UAE

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार UAE को अपने अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम की संभावित बिक्री को लेकर उच्चस्तरीय वार्ता कर रही है।

यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है। साथ ही यह संकेत भी देगा कि भारतीय रक्षा तकनीक अब वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बना रही है।

UAE की भारतीय हथियारों में बढ़ती दिलचस्पी

अब तक UAE अपनी रक्षा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर निर्भर रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता और स्वदेशी तकनीक ने खाड़ी देशों का ध्यान आकर्षित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय हथियार प्रणालियां अपेक्षाकृत कम लागत पर उच्च प्रदर्शन प्रदान करती हैं। यही कारण है कि UAE जैसे देश भारतीय रक्षा उत्पादों को गंभीरता से देख रहे हैं।

ब्रह्मोस: दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल

भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल को दुनिया की सबसे सफल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी गति लगभग मैख 2.8 से 3.0 तक पहुंचती है, जो इसे अधिकांश पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से कहीं अधिक तेज बनाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति, सटीकता और लक्ष्य भेदन क्षमता है। यह भूमि, समुद्र और हवा—तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है। ब्रह्मोस की एक और विशेषता इसकी लागत है। पश्चिमी देशों की कई आधुनिक मिसाइल प्रणालियों की तुलना में इसकी कीमत कम मानी जाती है, जबकि इसकी मारक क्षमता अत्यंत प्रभावी है।

आकाशतीर: आधुनिक वायु रक्षा का स्मार्ट नेटवर्क

ब्रह्मोस जहां आक्रामक क्षमता प्रदान करता है, वहीं आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित आकाशतीर एक उन्नत कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम है, जो विभिन्न रडार और सेंसर से प्राप्त सूचनाओं को एकीकृत कर हवाई खतरों की पहचान और प्रतिक्रिया को तेज बनाता है। इस प्रणाली का उद्देश्य विभिन्न एयर डिफेंस नेटवर्क के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, जिससे ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई खतरों का समय रहते मुकाबला किया जा सके।

UAE को क्यों चाहिए मजबूत एयर डिफेंस?

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। क्षेत्रीय तनाव, ड्रोन हमले और मिसाइल खतरों ने खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, UAE पहले से अमेरिकी THAAD और Patriot जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग करता है। लेकिन वह अपने रक्षा नेटवर्क को और अधिक एकीकृत और प्रभावी बनाने के लिए नई तकनीकों की तलाश में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रणालियां UAE के मौजूदा रक्षा ढांचे को अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकती हैं।

कई देशों की नजर ब्रह्मोस पर

फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीद चुका है। इसके अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब और ब्राजील सहित कई देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। भारत लगातार अपने रक्षा निर्यात का विस्तार कर रहा है और ब्रह्मोस को उसकी सबसे प्रमुख निर्यात योग्य रक्षा प्रणालियों में माना जा रहा है।

रक्षा निर्यात में भारत की बड़ी छलांग

पिछले एक दशक में भारत के रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ चुका है। आज भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। सरकार की “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” पहल ने रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को भी नई गति दी है।

भारत-UAE रक्षा सहयोग को मिल सकती है नई दिशा

भारत और UAE के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध मौजूद हैं। यदि ब्रह्मोस और आकाशतीर से जुड़ा संभावित समझौता आगे बढ़ता है, तो यह दोनों देशों के रक्षा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल हथियारों की बिक्री नहीं होगी, बल्कि भारत के उभरते रक्षा उद्योग और वैश्विक रणनीतिक प्रभाव का भी महत्वपूर्ण संकेत होगा।



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