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सुप्रीम कोर्ट ने AI के इस्तेमाल पर जारी किया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क, 20 जून तक मांगे सुझाव

Published on: June 9, 2026
Supreme Court on the use of AI

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : देश की न्यायिक व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने AI के इस्तेमाल को लेकर एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इस मसौदे पर आम जनता, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से 20 जून तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी गई हैं। हालांकि प्रस्तावित नियमों को लेकर कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है।

डेटा सुरक्षा और कानूनी आधार पर उठे सवाल

डिजिटल कानून विशेषज्ञ विराग गुप्ता ने मसौदे को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ड्राफ्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के किन प्रावधानों के तहत इसे लागू किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल 2026 में जारी एक न्यायिक आदेश के अनुसार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट तथा जिला अदालतों में ChatGPT, Gemini और Meta जैसे AI प्लेटफॉर्म का कानूनी शोध (लीगल रिसर्च) और न्यायिक निर्णयों में उपयोग प्रतिबंधित है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि सुप्रीम कोर्ट का नया फ्रेमवर्क मौजूदा न्यायिक आदेशों के साथ किस प्रकार समन्वय स्थापित करेगा।

विराग गुप्ता ने डेटा सुरक्षा को भी एक महत्वपूर्ण चिंता बताया। उनके अनुसार, अदालतों के मामलों से जुड़े दस्तावेज और सूचनाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संग्रहीत की जा रही हैं, जिनमें लाखों लोगों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियां शामिल हो सकती हैं। उन्होंने पूछा कि विदेशी AI प्लेटफॉर्म पर ऐसे डेटा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी, जबकि देश में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून, 2023 का पूर्ण क्रियान्वयन अभी बाकी है।

तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक कदम

वहीं, तकनीकी विशेषज्ञ कनिष्क गौर ने सुप्रीम कोर्ट की पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय उस दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिस पर दुनिया के कई देशों में अभी भी चर्चा चल रही है।

उन्होंने कहा कि मसौदा यह स्पष्ट करता है कि AI केवल एक सहायक उपकरण (टूल) होगा, न कि न्यायाधीश का विकल्प। इससे न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक की भूमिका और उसकी सीमाएं दोनों स्पष्ट होती हैं।

AI नहीं करेगा जमानत जैसे संवेदनशील फैसले

ड्राफ्ट नियमों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि AI को जमानत जैसे संवेदनशील न्यायिक निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक की क्षमता को सीमित करना नहीं, बल्कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक निष्पक्षता की रक्षा करना है।

सुप्रीम कोर्ट की AI समिति ने कहा है कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। न्यायिक प्रणाली में AI के उपयोग को लेकर यह पहल भविष्य में अदालतों के कामकाज और डिजिटल न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


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