रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की नौसेना ने इस जलमार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, जिससे यह इलाका बेहद संवेदनशील बन गया है। हाल ही में संघर्ष विराम के दौरान कुछ टैंकरों के गुजरने से स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन इसके तुरंत बाद फिर से मार्ग बंद कर दिया गया। दूसरी ओर, अमेरिकी नौसेना ने भी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए ईरान की ओर जाने वाले जहाजों पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे इतिहास के सबसे बड़े सप्लाई शॉक में से एक बताया है। ऐसे में तेल कंपनियां और देश वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुट गए हैं, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम की जा सके।
वैकल्पिक मार्गों पर नजर:
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन खाड़ी से लाल सागर तक तेल पहुंचाने का एक बड़ा विकल्प है, जिसकी क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन है, हालांकि वर्तमान में इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
हबशान-फुजैरा पाइपलाइन अबू धाबी के तेल को सीधे ओमान की खाड़ी तक पहुंचाती है और होर्मुज को बाईपास करने में सक्षम है, लेकिन हालिया ड्रोन हमलों से इसकी क्षमता प्रभावित हुई है।
इराक की किरकुक-सेहान पाइपलाइन भूमध्य सागर तक तेल पहुंचाने का विकल्प देती है, हालांकि इसकी वर्तमान क्षमता सीमित है।
ईरान की गोरेह-जास्क पाइपलाइन को भी एक संभावित विकल्प माना जा रहा है, जो ओमान की खाड़ी तक सीधा रास्ता देती है, लेकिन यह परियोजना अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है।
इसके अलावा, इराक-ओमान और इराक-जॉर्डन पाइपलाइन जैसे प्रस्तावित प्रोजेक्ट भी चर्चा में हैं, हालांकि ये अभी शुरुआती या रुके हुए चरण में हैं। वहीं, खाड़ी से ओमान सागर तक नहर बनाने का विचार भी सामने आया है, लेकिन इसकी लागत और तकनीकी चुनौतियां इसे फिलहाल दूर की संभावना बनाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का लंबे समय तक बंद रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है। तेल की कीमतों में उछाल, आपूर्ति में कमी और भू-राजनीतिक तनाव—इन सभी का असर दुनिया भर के देशों पर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्गों का विकास अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गया है।