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झगड़ा हमारा स्वभाव नहीं, भारत की परंपरा है भाईचारा: मोहन भागवत

Published on: November 30, 2025
Fighting is not our nature

द देवरिया न्यूज़ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि झगड़ा या विवाद करना भारत का स्वभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि सामूहिक सद्भाव और भाईचारा हमेशा से भारत की सांस्कृतिक परंपरा का मूल रहा है।

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, “हमारी किसी से बहस नहीं होती, हम विवादों से दूर रहते हैं। झगड़ा करना हमारे देश का स्वभाव ही नहीं है। मिल-जुलकर रहना और भाईचारे को बढ़ावा देना हमारी परंपरा है।”

उन्होंने कहा कि पश्चिमी दुनिया की सोच संघर्ष और मतभेदों से बनी है, जहां एक राय बनने के बाद अन्य विचारों को अस्वीकार कर दिया जाता है।

भागवत के अनुसार, भारत का राष्ट्रवाद पश्चिमी अवधारणा से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा, “पश्चिमी देश हमारे राष्ट्र के विचार को नहीं समझते, इसलिए वे इसे राष्ट्रवाद कहते हैं। जबकि हमारे यहां राष्ट्र की अवधारणा सदियों पुरानी है।”

भागवत ने यह भी कहा कि भारत में ‘राष्ट्रीयता’ शब्द इसलिए इस्तेमाल होता है क्योंकि यहाँ देशभक्ति अहंकार या अत्यधिक गर्व से नहीं, बल्कि गहन आत्मचिंतन और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व की भावना से निकलती है। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रवाद’ शब्द से पश्चिम में डर पैदा होता है क्योंकि अत्यधिक राष्ट्र-गर्व ने दो विश्व युद्धों को जन्म दिया था।


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