द देवरिया न्यूज़,पटना : बिहार की नई सरकार के गठन के बाद भाजपा नेता और पूर्व डिप्टी सीएम पद के दावेदार माने जा रहे विजय कुमार सिन्हा को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्हें सत्ता के केंद्र से दूर करने की कोशिश हो रही है? खासकर तब, जब हाल तक उन्हें मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में देखा जा रहा था।
नई सरकार में उन्हें पहले वाला राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग नहीं दिया गया। इसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी हलकों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं।
“राजनीति में नंबर-2 को मजबूत नहीं होने दिया जाता”
राजनीतिक विज्ञान के शोधार्थी कुमार देवदत्त का कहना है कि सत्ता की राजनीति में शीर्ष नेतृत्व अक्सर अपने नीचे किसी मजबूत “नंबर-2” नेता को उभरने नहीं देना चाहता।
उन्होंने कहा,
“राजनीति में सत्ता ही अंतिम लक्ष्य होती है। शीर्ष पर बैठा व्यक्ति चाहता है कि शक्ति उसी के पास केंद्रित रहे। उसे हमेशा यह डर रहता है कि कोई मजबूत दूसरा नेता भविष्य में चुनौती बन सकता है।”
राजस्व विभाग में बढ़ी थी विजय सिन्हा की छवि
देवदत्त के मुताबिक, 2025 विधानसभा चुनाव के बाद विजय सिन्हा ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे। इससे जनता के बीच उनकी छवि मजबूत हुई और भूमाफिया व भ्रष्ट अधिकारियों में डर पैदा हुआ।
उन्होंने कहा कि विभाग में चल रही कार्रवाई से विजय सिन्हा का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन जातीय समीकरणों के कारण वे शीर्ष पद की दौड़ में पीछे रह गए।
“जानबूझकर नहीं दिया गया पुराना विभाग”
विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें दोबारा वही विभाग नहीं दिया जाना एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
कुमार देवदत्त ने कहा,
“यह साफ दिखता है कि उन्हें जानबूझकर राजस्व विभाग नहीं दिया गया। किसी न किसी दबाव में यह फैसला लिया गया होगा।”
उन्होंने दावा किया कि राजस्व विभाग बिहार के सबसे अधिक भ्रष्ट विभागों में गिना जाता है और यदि विजय सिन्हा वहां दोबारा काम करते तो भ्रष्टाचार पर और बड़ी कार्रवाई हो सकती थी।
फैसलों को पलटने पर भी सवाल
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि नई सरकार बनने के बाद विजय सिन्हा द्वारा पहले लिए गए कुछ फैसलों में बदलाव किया जा रहा है। इससे उनके समर्थकों में नाराजगी की चर्चा है।
देवदत्त ने कहा कि जिस तरह से कुछ अधिकारी उनके हटने पर राहत महसूस कर रहे हैं, उससे संकेत मिलता है कि विभाग में उनके सख्त रवैये से कई लोग असहज थे।
अब कृषि विभाग की जिम्मेदारी
हालांकि नई सरकार में विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भी बेहद महत्वपूर्ण विभाग है, क्योंकि बिहार की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है।
देवदत्त ने कहा,
“कोई भी विभाग छोटा नहीं होता। यदि विजय सिन्हा कृषि क्षेत्र में प्रभावी काम करते हैं तो वे पहले से भी बड़ा जनाधार बना सकते हैं।”
फिलहाल भाजपा या सरकार की ओर से इन राजनीतिक चर्चाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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