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लोकसभा में अमित शाह का बड़ा बयान—‘नक्सलियों के दिन लद गए, देश को हिंसा से मुक्त करेंगे’

Published on: April 5, 2026
Amit Shah's big in Lok Sabha
द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अब नक्सली हिंसा के दिन गिने-चुने रह गए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।
लोकसभा में नियम 193 के तहत हो रही चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने एक पीड़ित बच्ची का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह नक्सलियों ने बचपन छीन लिया। शाह ने कहा कि जब उस बच्ची को नेल पॉलिश दी गई, तो वह रोने लगी। पूछने पर उसने बताया कि 7 साल की उम्र में उसे नक्सलियों ने अगवा कर लिया था और तब से वह सामान्य जीवन नहीं जी पाई।
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि आदिवासी समाज के बच्चों और परिवारों का जीवन भी बर्बाद किया है। उन्होंने बताया कि बस्तर जैसे इलाकों में नक्सली साप्ताहिक बाजारों में लोगों के सामने उनके माता-पिता के साथ मारपीट करते हैं, जिससे बच्चों के मन पर गहरा असर पड़ता है।
अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग नक्सलवाद पर सवाल उठाते हैं, उन्हें एक बार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वास्तविकता देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 25-30 साल तक इन इलाकों के बच्चे जंगलों में भटकते रहे और विकास से पूरी तरह वंचित रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद की जड़ें केवल गरीबी या विकास की कमी में नहीं हैं, बल्कि यह एक वैचारिक समस्या है। शाह के अनुसार, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और राज्य की सीमित पहुंच का फायदा उठाकर वामपंथी विचारधारा ने आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाई और भोले-भाले लोगों को गुमराह किया।
गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले आदिवासी समाज बिरसा मुंडा, तिलका मांझी और रानी दुर्गावती जैसे नायकों को अपना आदर्श मानता था, लेकिन बाद में नक्सल प्रभाव के चलते विचारधारा में बदलाव आया। उन्होंने इस बदलाव को चिंताजनक बताया।
अंत में अमित शाह ने दो टूक कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर समस्या का समाधान संवैधानिक तरीकों से संभव है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हिंसा और हथियार उठाना किसी समस्या का समाधान हो सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा से डरने वाली नहीं है, बल्कि सभी के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गृह मंत्री के इस बयान को नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की सख्त नीति और स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

इसे भी पढ़ें : राहुल गांधी पर बीजेपी का हमला, शहजाद पूनावाला बोले—कांग्रेस फैला रही गलत जानकारी


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