ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को टैग किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक महीने के भीतर सूत की कीमतों में तेज उछाल आया है, जबकि तैयार कपड़े की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। इससे छोटे पावरलूम संचालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मालेगांव और भिवंडी, गुजरात के सूरत, उत्तर प्रदेश के वाराणसी, तमिलनाडु के इरोड और कोयंबटूर जैसे प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। उत्पादन घट रहा है और कई छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
ओवैसी ने दावा किया कि यह संकट देश के सबसे बड़े श्रम-प्रधान उद्योगों में से एक को प्रभावित कर रहा है, जहां लगभग 40 से 60 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।
AIMIM प्रमुख ने केंद्र सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि कच्चे कपास और सूत के निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही कच्चे कपास पर लगाए गए आयात शुल्क को हटाया जाए। इसके अलावा चीनी आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने और फैब्रिक व गारमेंट्स के निर्यात प्रोत्साहन को बढ़ाने की भी मांग की।
इधर, कपड़ा उद्योग से जुड़े संगठनों ने भी सरकार से कपास पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क को हटाने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि इस शुल्क के कारण घरेलू बाजार में कपास महंगा हो रहा है और इसका सीधा असर टेक्सटाइल सेक्टर की प्रतिस्पर्धा पर पड़ रहा है।
उद्योग संगठन भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (CITI) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में भी कपास पर आयात शुल्क को नुकसानदायक बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति की कमी के समय आयातित कपास तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही फाइबर की गुणवत्ता सुधारने और घरेलू बाजार को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की सिफारिश की गई है।
‘भारत में कपास की आपूर्ति, मूल्य निर्धारण एवं व्यापार नीति का आर्थिक विश्लेषण’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट गर्जी और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC) ने संयुक्त रूप से तैयार की है।
सिटी के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि यदि भारत को 2030 तक वस्त्र एवं परिधान उद्योग का 350 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करना है, जिसमें 100 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है, तो कपास और सूत की आपूर्ति को स्थिर और सस्ता बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।