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बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते पर बवाल, ढाका में बढ़ी रद्द करने की मांग

Published on: May 7, 2026
Bangladesh-US trade agreement
द  देवरिया न्यूज़,ढाका। बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुआ हालिया व्यापार समझौता देश में विवाद का कारण बन गया है। आलोचकों का कहना है कि यह समझौता एकतरफा है, जिसमें बांग्लादेश पर अधिक जिम्मेदारियां डाली गई हैं, जबकि अमेरिका के लिए शर्तें बेहद सीमित हैं। इसको लेकर अब समझौता रद्द करने की मांग तेज हो गई है।
यह समझौता 9 फरवरी को अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में संसदीय चुनाव से ठीक पहले साइन किया गया था। विपक्ष और कई विशेषज्ञों ने इसे जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त चर्चा के किया गया फैसला बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हस्ताक्षर के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े फैसले को रद्द कर दिया, जिससे इस डील की टाइमिंग पर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि यह समझौता अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश ने इसके तहत अमेरिकी उत्पादों के आयात को लेकर शुरुआती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
समझौते में कुल छह प्रमुख अनुच्छेद हैं, जिनमें विस्तृत शर्तें शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश को 131 शर्तों का पालन करना होगा, जबकि अमेरिका पर केवल 6 शर्तें लागू होंगी।
समझौते के तहत बांग्लादेश को अमेरिकी उत्पादों पर निर्धारित टैरिफ लगाने होंगे और उन पर कोटा लागू नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, गैर-टैरिफ बाधाओं जैसे लाइसेंस, निरीक्षण और गुणवत्ता जांच जैसी प्रक्रियाओं को सीमित करना होगा, जिससे अमेरिकी सामानों की एंट्री आसान हो सके।
इसके अलावा, बांग्लादेशी बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों को प्राथमिकता देने, बौद्धिक संपदा अधिकारों की कड़ी सुरक्षा लागू करने और सेवा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव न करने जैसी शर्तें भी शामिल हैं।
डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में भी बांग्लादेश पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिसमें डिजिटल सेवाओं पर भेदभावपूर्ण कर न लगाने और अन्य देशों के साथ ऐसे समझौते न करने की शर्त है, जो अमेरिकी हितों के खिलाफ हों। यदि ऐसा होता है, तो अमेरिका को इस समझौते को समाप्त करने का अधिकार होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों में बांग्लादेश को संवेदनशील तकनीक के व्यापार में अमेरिका के साथ समन्वय करने और कुछ देशों से परमाणु सामग्री की खरीद पर प्रतिबंध जैसी शर्तों का पालन करना होगा।
इन सभी प्रावधानों को लेकर बांग्लादेश में व्यापक बहस छिड़ गई है, और कई राजनीतिक व आर्थिक विश्लेषक इसे देश के हितों के खिलाफ बताते हुए पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : भारतीय पत्रकार आनंद आर के और सुपर्णा शर्मा को पुलित्जर पुरस्कार, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग के लिए सम्मान


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