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भारत की ऐतिहासिक जीत के पीछे छिपी भावनात्मक कहानी: अमनजोत कौर की दादी का आशीर्वाद बना प्रेरणा

Published on: November 5, 2025
India's historic victory

द देवरिया न्यूज़ : भारत की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। नवी मुंबई के डी.वाई. पाटिल स्टेडियम में कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर यह गौरव हासिल किया। पूरे देश में इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन इस विजय के पीछे एक गहराई से जुड़ी भावनात्मक कहानी भी छिपी है—टीम की ऑलराउंडर अमनजोत कौर की।

दादी को आया दिल का दौरा, लेकिन परिवार ने छुपाई सच्चाई

अमनजोत कौर के पिता भूपिंदर सिंह, जो पेशे से बढ़ई और ठेकेदार हैं, अपनी 75 वर्षीय मां भगवंती कौर को बीते हफ्ते दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल ले गए थे। लेकिन उन्होंने यह बात अपनी बेटी से छिपा ली। कारण था—वर्ल्ड कप का फाइनल मैच और बेटी का ध्यान केवल खेल पर बनाए रखना।

भूपिंदर बताते हैं, “अमनजोत को महसूस हो गया था कि ‘बीजी’ (दादी) ठीक नहीं हैं। उसने अपनी बहन से बात की, फिर मुझे फोन किया और कहा कि बीजी से वीडियो कॉल कराओ। तब मैंने मां से कहा कि आज उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा मैच है, उसे आशीर्वाद दो। मां ने सिर्फ इतना कहा—‘ऑल द बेस्ट।’ बस वही आशीर्वाद उसके लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया।”

उन्होंने बताया कि दादी की असली स्थिति फाइनल के बाद बताई गई, ताकि अमनजोत का मनोबल मैच के दौरान कमजोर न हो। “बीजी ने कहा था कि वो मेरी पोती नहीं, मेरे पोते से भी बढ़कर है,” भूपिंदर गर्व से कहते हैं।

‘बीजी’ हमेशा बनीं अमनजोत की ताकत

दिल का दौरा झेल चुकीं भगवंती कौर आज भी अपनी पोती पर गर्व करती हैं। जब अमनजोत बचपन में मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी, तो दादी पार्क में कुर्सी लेकर बैठ जाती थीं ताकि कोई उसे तंग न करे। भूपिंदर कहते हैं, “मैं दुकान पर काम करता था, लेकिन मां हर मैच में उसके साथ होती थीं। अब जब वो अस्पताल में हैं, तो यह वर्ल्ड कप जीत हमारे लिए तनाव के बीच मरहम जैसी है।”

स्केटिंग और हॉकी से शुरू हुआ सफर, क्रिकेट बना जुनून

अमनजोत की खेल यात्रा स्केटिंग और हॉकी से शुरू हुई थी। बाद में पड़ोसी की सलाह पर भूपिंदर ने क्रिकेट की ओर उसका रुख कराया। उन्हें कोच नागेश गुप्ता मिले, जिन्होंने उसे चंडीगढ़ के सेक्टर 32 के मैदान में प्रशिक्षण देना शुरू किया।

भूपिंदर याद करते हैं, “मैं काम के बाद एक्स्ट्रा काम करता ताकि उसकी ट्रेनिंग की जरूरतें पूरी कर सकूं। उसे खुद मैदान तक छोड़ता और लाता था। बाद में जब उसे स्कूटी मिली, तो वह बोली—‘पापा, चिंता न करो, अब मैं बड़ी हो गई हूं।’”

कोच बोले—‘उसके बल्ले का पंच बताता था कि वो ऑलराउंडर बनेगी’

कोच नागेश गुप्ता बताते हैं, “जब वह पहली बार अकादमी में आई, तो उसका रन-अप और रिस्ट पोजिशन शानदार था। थोड़ी गेंदें भटकती थीं, तो हमने ‘स्पॉट बॉलिंग’ और तकनीकी सुधार पर काम किया। जब मैंने उसे बल्लेबाजी करते देखा, तो उसके बल्ले का पंच बता रहा था कि यह लड़की एक दिन टीम इंडिया में खेलेगी।”

चोट से उभरी योद्धा, बनी विश्व विजेता

अमनजोत ने 2023 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 में डेब्यू किया और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनीं। उसी साल उन्हें मुंबई इंडियंस ने WPL में खरीदा। लेकिन जल्द ही वह पीठ की स्ट्रेस इंजरी और हाथ के लिगामेंट फटने से आठ महीने तक मैदान से दूर रहीं। कोच गुप्ता कहते हैं, “उसने रिकवरी के दौरान मानसिक मजबूती पर काम किया और खुद को पहले से बेहतर बनाया।”

विश्व कप में चमकी प्रदर्शन की रोशनी

वर्ल्ड कप में अमनजोत ने श्रीलंका के खिलाफ 124/6 की स्थिति में सातवें नंबर पर उतरकर अर्धशतक जड़ा। वहीं सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया की शतकवीर फीबी लिचफील्ड का विकेट लेकर भारत को फाइनल में पहुंचाया।
फाइनल मुकाबले में उसने दक्षिण अफ्रीका की कप्तान एल वोल्वार्ट का अहम कैच पकड़ा, जिसने जीत की नींव रखी।

परिवार का प्यार बना सबसे बड़ा संबल

जब अमनजोत मैदान पर देश का नाम रोशन कर रही थी, उसी वक्त उसके पिता, मां रंजीत कौर, और भाई-बहन कमलजोत कौर व गुरकृपाल सिंह दादी की देखभाल में लगे थे। भूपिंदर ने कहा, “अगर मां ठीक होतीं, तो वे गुरुद्वारे जाकर कराह प्रसाद बनवातीं और भगवान का धन्यवाद करतीं। यह जीत सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि एक बेटी और उसके परिवार की है—जिसने प्यार से एक झूठ बोला ताकि उसका सपना पूरा हो सके।”


इसे भी पढ़ें : योगी सरकार की अयोध्या को बड़ी सौगात: तैयार हुआ डॉ. भीमराव अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, 9 नवंबर से शुरू होगी अयोध्या प्रीमियर लीग

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